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सॉलिड वेस्ट का प्रबंधन न करने पर 319 संस्थानों को नोटिस

Tue, 13 Nov 2018 12:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 13 Nov 2018 12:40 AM IST
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notice to many hotels for solid waste management
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोसेसिंग प्लांट - फोटो : file photo

निजी क्षेत्र का क्या होटल ताज, क्या पर्यटन निगम का होटल गोमती और क्या केजीएमयू, सभी पर्यावरण नियमों की धज्जिजयां उड़ा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लखनऊ समेत पांच जिलों के 319 संस्थानों को सॉलिड वेस्ट का ठीक से निस्तारण न करने पर नोटिस भेजा है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा और गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज, अस्पताल व संस्थान, आवासीय कॉलोनी और स्कूल-कॉलेजों को नोटिस भेजे हैं। 
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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के प्रावधानों के अनुसार, ठोस अपशिष्ट का निस्तारण न करने पर यह कार्रवाई की गई है। इसमें कहा गया है कि ये प्रबंधन नियमावली 8 अप्रैल 2016 को जारी की गई थी, जिसका साल भर के अंदर पालन अनिवार्य किया गया था।
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इसके तहत सभी आवास कल्याण, बाजार संघ, 5 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले सभी गेट लगे समुदाय व संस्थान, होटल और रेस्टोरेंट के लिए यह व्यवस्था की गई है कि वे अपशिष्ट को स्रोत पर ही अलग-अलग करेंगे। 

बायोडिग्रेडेबल वेस्ट की कम्पोस्टिंग के लिए परिसर में ही यूनिट लगाएंगे, जबकि प्लास्टिक वेस्ट को रिसाइक्लर को देंगे। वहीं, इनर्ट वेस्ट (जो न कम्पोस्ट हो सके और न ही रिसाइकल) को संबंधित अथॉरिटी को देंगे।

लेकिन, नियमों के पालन के लिए दी गई छूट की समयसीमा खत्म होने के बाद भी इन संस्थानों ने न अपने यहां ये व्यवस्थाएं कीं और न ही इस संबंध में अपनी कार्ययोजना राज्य बोर्ड को भेजी। इसलिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 की धारा 5 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के प्रावधान के अनुसार, निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इस मामले में उठाए गए कदम और कार्ययोजना बोर्ड के सामने प्रस्तुत की जाए। 

अनुपालन आख्या हर तिमाही में बोर्ड में आनी चाहिए। कहा गया है कि इस संबंध में की गई कार्यवाही से 15 दिन के भीतर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अवगत कराया जाए।

 अन्यथा, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने बताया कि नियमानुसार बड़े पैमाने पर ठोस अपशिष्ट पैदा करने वाले संस्थानों को इसके निस्तारण की व्यवस्था भी खुद करनी होती है। 

इन नियमों का पालन न करने पर लखनऊ के 76, कानपुर के 78, आगरा के 102, वाराणसी के 25 और गोरखपुर के 38 संस्थानों के लिए नोटिस भेजे गए हैं।

क्या हो सकती है सजा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों के प्रबंधन के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर कर सकता है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में दोषी पाए जाने वाले प्रबंधक को 5 साल की सजा या 25 हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

कम्पोस्टिंग प्लांट लगाने में नहीं आता ज्यादा खर्च

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने में कोई विशेष खर्च नहीं आता। 50 किलोग्राम प्रतिदिन कूड़ा निकलने पर कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने में ढाई से तीन लाख रुपये का ही खर्च आता है। वहीं, प्लास्टिक वेस्ट को निस्तारित करने के लिए जगह-जगह रिसाइक्लर हैं।
 
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