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Lucknow News: जोखिम से जंग नहीं, जॉब की जमीनी राह पर युवा सीए

Tue, 08 Jul 2025 01:55 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jul 2025 01:55 AM IST
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No war against risks, young CAs on the ground path to jobs
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की परीक्षा पास कर सीए बने राजधानी के 50 से ज्यादा
लखनऊ। एक सपना था... संतुलित बैलेंस शीट, टैक्स की टेढ़ी गलियों से पार पाना और नाम के आगे जुड़ा एक गौरवशाली तमगा: सीए। राजधानी के 50 से ज्यादा युवाओं ने इस सपने को साकार किया है, लेकिन अब ये युवा सीए खुद की फर्म खोलने के बजाय कॉरपोरेट नौकरी की ओर बढ़ चले हैं।
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गोमतीनगर स्थित आईसीएआई भवन में सोमवार को हुए सम्मान समारोह में जब इन नव चयनितों को सम्मानित किया गया, तो हर चेहरे पर मेहनत की चमक थी और आंखों में था भविष्य का फाइनेंशियल प्लान। हालांकि, बातचीत में ज्यादातर ने बताया कि वो खुद की प्रैक्टिस को लेकर फिलहाल पीछे हट रहे हैं।
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खुद का दफ्तर नहीं, पहले किसी और की कंपनी
करीब 80 फीसदी युवा सीए नौकरी को तरजीह दे रहे हैं। उनका कहना है कि खुद की प्रैक्टिस में सिर्फ ज्ञान नहीं, मोटी पूंजी, नेटवर्क और कई सालों की जद्दोजहद भी चाहिए। क्लाइंट बेस बनाने से लेकर मार्केट में पहचान बनाने तक का सफर लंबा और जोखिम भरा है।
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संघर्ष से पहले सुरक्षित मंजिल

कुछ युवाओं ने यह भी कहा कि पहले कुछ साल नौकरी से सीखेंगे, अनुभव जुटाएंगे और भविष्य में खुद का ऑफिस खोलने का सपना साकार करेंगे। वहीं, महज 20 फीसदी ही ऐसे हैं जो सीधे प्रैक्टिस की राह चुनने को तैयार हैं जिन्हें जोखिम में भी अपना रोमांच दिखता है।
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खुद की प्रैक्टिस में लंबा हो जाता है संघर्ष
शहर में दूसरी रैंक हासिल करने वाल नव चयनित सीए ओजस्व ने बताया कि आगे वो कॉरपोरेट की नौकरी जॉइन करेंगे। उनके पिता अध्यापक हैं। बताया कि काफी संघर्ष के बाद यहां तक पहुंचे हैं। खुद की प्रैक्टिस की तो आगे और संघर्ष करना होगा। जॉब से फौरन पैसे मिलने शुरू हो जाएंगे। अच्छी कंपनी में 25 लाख तक के सालाना पैकेज का भी ऑफर मिल जाता है।

नौकरी की राह है आसान
चार्टर्ड अकाउंटेंट परीक्षा में राजधानी में तीसरी रैंक हासिल करने वाले सीतापुर रोड निवासी धीरज सिंहल ने भी आगे के कॅरिअर के लिए नौकरी को ही चुना है। उनके पिता पियूष सिंघल व्यवसायी हैं। उन्होंने बातचीत में बताया कि सीए के अंतिम परिणाम तक पहुंचने में पांच साल लग गए। खुद की प्रैक्टिस में आगे और समय देना होगा, जिसमें जोखिम भी है।


राजधानी को हर साल मिलते हैं औसतन डेढ़ सौ सीए
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की लखनऊ ब्रांच के चेयरमैन अनुराग पांडेय ने बताया कि हर साल तीन बार सीए की परीक्षा होती है और लखनऊ को हर बार औसतन 50 सीए मिलते हैं। इस तरह साल में लगभग 150 सीए राजधानी को मिलते हैं। सीए फाइनल की परीक्षा में इस बार कुल 730 अभ्यर्थी शामिल हुए। इसमें से 30 ने दोनों ग्रुप, 18 ने पहला और 22 ने दोनों ग्रुप में सफलता हासिल की। अंतिम रूप से इस साल करीब 50 अभ्यर्थी सीए बने।
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