यूपी में चार महीने में भी नहीं हो सकी वेंटिलेटर खरीद, कंपनी का रेट ज्यादा होने से प्रक्रिया रुकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए लेवल थ्री कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर लगाने के निर्देश दिए गए थे। मगर चार माह बाद भी इनकी खरीद नहीं हो पाई है। इमरजेंसी की स्थिति होने के बावजूद खरीद प्रक्रिया टेंडर और अधिक मूल्य में फंसकर रह गई।
गत 26 मार्च को निदेशक संचारी रोग ने यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड को 200 वेंटिलेटर की आपूर्ति के लिए पत्र भेजा था। इस पर कॉर्पोरेशन के महाप्रबंधक उपकरण उपार्जन ने निदेशक संचारी रोग विभाग को पत्र लिखकर आपूर्ति किए जाने वाले स्थानों की जानकारी मांगी थी। कई अन्य कागजी प्रक्रिया के बाद दो बार टेंडर निकाला गया, जिसमें एक फर्म को एल (लिस्टिंग) वन घोषित किया गया।
बताया जा रहा है कि इस फर्म ने वेंटिलेटर का रेट लगभग 13.92 लाख रुपये कोट किया था, जबकि शासन ने 13 लाख में खरीद की अनुमति दी थी। चयनित फर्म के खिलाफ यह भी आरोप लगाया गया है कि उसने नागपुर मेडिकल कॉलेज को 11.13 लाख में ऐसे ही वेंटिलेटर की आपूर्ति की है। अधिक मूल्य को लेकर मोलभाव भी हुआ पर बात नहीं बनी और खरीद प्रक्रिया ठप पड़ गई। बताया जा रहा है चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निर्धारित रेट पर ही वेंटिलेटर खरीदने के निर्देश दिए हैं।
पीएम केयर फंड से मिले 500 वेंटिलेटर
महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि प्रधानमंत्री केयर फंड से प्रदेश को 500 से अधिक वेंटिलेटर मिले हैं। इन्हें चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा स्वास्थ्य को जरूरत के अनुसार दिया जा रहा है। यूपीएमएससीएल से भी वेंटिलेटर खरीदे जाने थे। वह अलग प्रक्रिया चल रही है।
यूपीएमएससीएल की प्रबंध निदेशक श्रुति सिंह का कहना है कि पीएम केयर से मिले वेंटिलेटर से यूपीएमएससीएल को कोई मतलब नहीं है। हमारी खरीद प्रक्रिया अभी चल रही है। हमें भी कहा जाएगा तो वेंटिलेटर की आपूर्ति की जाएगी। वेंटिलेटर के रेट की जानकारी नहीं है।