7000 करोड़ खर्च, अनपरा ‘डी’ से नहीं मिली बिजली
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एक हजार मेगावाट क्षमता की अनपरा ‘डी’ परियोजना पर 7000 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी प्रदेश को बिजली नहीं मिल पा रही है।
भारत सरकार के उपक्रम बीएचईएल द्वारा स्थापित इस परियोजना की पहली इकाई 31 मार्च को लोकार्पण के बाद से नहीं चल पा रही है। बीएचईएल इसकी तकनीकी खामियां ठीक नहीं करा पा रहा।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसको लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष जनहित प्रत्यावेदन दाखिल कर हस्तक्षेप की मांग की है।
परिषद ने इकाइयों की स्थापना में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बीएचईएल के खिलाफ सीबीआई जांच की संस्तुति करने का अनुरोध किया है।
लिया गया भारी ऋण, जनता भुगतेगी खामियाजा
उपभोक्ता परिषद की ओर से आयोग के समक्ष दाखिल प्रत्यावेदन में बिजली मंत्रालय व बीएचईएल प्रबंधन को पत्र भेजकर जांच का अनुरोध किया गया है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अनपरा ‘डी’ परियोजना लगभग 8 साल में तैयार हुई है जिस पर लागत 7027.40 करोड़ आई है। 2015-16 के टैरिफ आर्डर के अनुसार अनपरा ‘डी’ परियोजना से 2916 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी जानी है। 2.96 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब लगभग 864 करोड़ रुपये की बिजली खरीद होनी है। इस सस्ती बिजली से उपभोक्ताओं को राहत मिलती।
चूंकि परियोजना के लिए बडे़ पैमाने पर ऋण लिया गया है, इसलिए भविष्य में इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा।
वर्मा का कहना है कि नियामक आयोग के अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में पूरी जानकारी मंगाकर परीक्षण किया जाएगा। जरूरी हुआ तो बिजली मंत्रालय, बीएचईएल को पत्र भी लिखा जाएगा।