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यूपी: अस्पतालों में कोरोना मरीजों की भर्ती के लिए सीएमओ के पत्र की आवश्यकता खत्म, अब सीधे होगी भर्ती

Wed, 21 Apr 2021 01:50 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 21 Apr 2021 01:50 PM IST
सार

मानवाधिकार आयोग ने मरीजों की भर्ती के लिए जरूरी सीएमओ के रैफरल लेटर की जरूरत को समाप्त कर सीधे अस्पतालों को भर्ती करने का अधिकार देने के निर्देश दिए हैं।

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no need a letter from CMO to admit a patient in a hospital.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

कोरोना से अस्पतालों में गंभीर मरीजों को आ रही दिक्कतों के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के सदस्य जस्टिस केपी सिंह और ओपी दीक्षित ने निर्देश दिए हैं कि यूपी सरकार तत्काल सरकारी व निजी अस्पतालों के बाहर नोटिस बोर्ड लगवाए कि वहां कितने बेड खाली और कितने भरे हुए हैं जिससे मरीजों को भर्ती कराना आसान हो। आयोग ने मिल रही शिकायतों के बाद ये दिशा-निर्देश यूपी सरकार को जारी किए हैं।

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आयोग ने कहा कि कई सरकारी व निजी अस्पतालों में बेड खाली होने के बाद भी मरीजों को भर्ती न करने की जानकारी मिल रही है। मरीजों को सही जानकारी न होने से भटकना पड़ रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि अस्पतालों के बाहर नोटिस बोर्ड पर बेड की उपलब्धता की नवीनतम जानकारी दी जाए।
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आयोग ने मरीजों की भर्ती के लिए जरूरी सीएमओ के रैफरल लेटर की जरूरत को समाप्त कर सीधे अस्पतालों को भर्ती करने का अधिकार देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों को स्वविवेक से मरीजों को भर्ती करने के निर्देश देने को कहा है। आयोग ने निर्देशों का पालन कर एक सप्ताह में मुख्य सचिव से रिपोर्ट भी मांगी है।

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लोहिया संस्थान में हुई पांच मौतों पर मांगी रिपोर्ट

राज्य मानवाधिकार आयोग ने लोहिया संस्थान में ऑक्सीजन आपूर्ति बंद होने से हुई पांच मौतों की जांच रिपोर्ट भी मांगी है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को नोटिस जारी किया है। नोटिस में उच्चस्तरीय जांच व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट 10 दिन में देने के निर्देश दिए हैं। 

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