20 हजार कर्मियों की आफत, नहीं मिलेगा वेतन
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प्रदेश की सहकारी समितियों के 20 हजार से ज्यादा कर्मचारियों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। ऋण वसूली बंद होने से उन्हें न तो अप्रैल माह का वेतन मिल पाया और न मई का वेतन मिलने की उम्मीद दिख रही है।
परेशान कर्मचारियों ने अब आंदोलन का फैसला किया है। इसके पहले चरण में 1 जून को राजधानी स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय पर धरना दिया जाएगा।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने किसानों को दिए जाने वाले ऋण की वसूली में ढील दे दी है।
सहकारी समितियों के माध्यम से दिए जाने ऋण को अल्पकालिक से बदलकर मध्यकालिक कर दिया गया है। पहले समितियों को एक वित्तीय वर्ष (मार्च से अगले वर्ष अप्रैल तक) में दिए गए ऋण को उसी वर्ष 30 जून (1 अप्रैल से 30 जून) तक वसूली का अधिकार प्राप्त था।
ऋण को अल्पकालिक से बदलकर मध्यकालिक कर देने से किसानों को ऋण चुकाने के लिए तीन महीने के बजाय दो वर्ष का मौका मिल गया है।
वेतन पर लिया जाता था कमीशन
सरकार का फैसला किसानों के लिए तो राहत भरा है लेकिन सहकारी समितियों के कर्मचारियों के लिए मुसीबत आ गई है।
दरअसल, इन कर्मचारियों को ऋण वसूली पर मिलने वाले 2.5 प्रतिशत कमीशन से वेतन का भुगतान किया जाता है।
चूंकि ऋण वसूली नहीं हो रही है इसलिए समितियों को कमीशन भी नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा, अप्रैल से भुगतान रुक गया है।
सहकारी समिति कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल गौड़ का कहना है कि उन्हें किसानों को दी गई राहत पर कोई आपत्ति नहीं है।
पर, सरकार को कर्मचारियों के वेतन की व्यवस्था करानी चाहिए। सरकार ने इस पर विचार नहीं किया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।