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पार्टटाइम पीएचडी के लिए नहीं देनी होगी प्रवेश परीक्षा
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प्रतीकात्मक चित्र।
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय नए सत्र से पार्ट टाइम पीएचडी भी कराएगा। इसके लिए नौकरी पेशा व्यक्ति को प्रवेश परीक्षा नहीं देनी होगी। इंडस्ट्री एकेडमिया को-आर्डिनेशन को बेहतर बनाने व नौकरीपेशा लोगों को पीएचडी कराने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय की विद्या व कार्य परिषद से ऑर्डिनेंस एप्रूव कराकर राजभवन भेजा गया था, जहां से इसे हरी झंडी मिल गई है, जिसके अनुसार अब प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नियमानुसार इसके तहत हर विभाग में सुपर न्यूमरेरी सीट के रूप में इसका प्रवेश लिया जाएगा। प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी को अपने संस्थान के अध्यक्ष से एनओसी लेकर विश्वविद्यालय में जमा करानी होगी। ऐसे अभ्यर्थी को नियमित अटेंडेंस से छूट मिलेगी, लेकिन प्रति सेमेस्टर 6 दिन की अटेंडेंस अनिवार्य होंगी। ऐसे अभ्यर्थी को किसी भी तरह की फेलोशिप या स्कॉलरशिप नहीं दी जाएगी।
कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि पार्ट टाइम पीएचडी पूरी करने के लिए न्यूनतम समय सीमा चार साल व अधिकतम आठ साल रखी गई है। इसमें प्रवेश के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जब एक अभ्यर्थी की पीएचडी पूरी हो जाएगी तभी अर्ह शिक्षक दूसरे अभ्यर्थी को पार्ट टाइम पीएचडी के लिए रख सकेंगे। यह अपने तरह का अलग प्रयोग है और इसे लेकर नौकरी पेशा लोगों में काफी उत्साह भी है।
यह होगी अनिवार्यता
पार्ट टाइम पीएचडी के लिए अलग से टेस्ट देना होगा, जिसमें 70 फीसदी वेटेज 1000 शब्द के राइटअप पर और 30 फीसदी उनके अनुभव, एकेडमिक योग्यता और इंटरव्यू पर मिलेगा। अभ्यर्थी को अपने क्षेत्र में पांच साल की सर्विस पूरी करना अनिवार्य होगा।
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कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि पार्ट टाइम पीएचडी पूरी करने के लिए न्यूनतम समय सीमा चार साल व अधिकतम आठ साल रखी गई है। इसमें प्रवेश के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जब एक अभ्यर्थी की पीएचडी पूरी हो जाएगी तभी अर्ह शिक्षक दूसरे अभ्यर्थी को पार्ट टाइम पीएचडी के लिए रख सकेंगे। यह अपने तरह का अलग प्रयोग है और इसे लेकर नौकरी पेशा लोगों में काफी उत्साह भी है।
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यह होगी अनिवार्यता
पार्ट टाइम पीएचडी के लिए अलग से टेस्ट देना होगा, जिसमें 70 फीसदी वेटेज 1000 शब्द के राइटअप पर और 30 फीसदी उनके अनुभव, एकेडमिक योग्यता और इंटरव्यू पर मिलेगा। अभ्यर्थी को अपने क्षेत्र में पांच साल की सर्विस पूरी करना अनिवार्य होगा।
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