कोरोना वायरस पर होगा मंथन, बनेगी नई गाइडलाइन

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Thu, 12 Mar 2020 01:48 AM IST
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कोरोना से निपटने के लिए बनेगी नई कार्ययोजना
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पीजीआई में 15 मार्च के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे मंथन
गलतफहमियां दूर कर आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की तैयार होगी गाइडलाइन
चंद्रभान यादव
लखनऊ। कोरोना आखिर कितना खतरनाक है, इसके इलाज की गाइडलाइन क्या होनी चाहिए, लोगों में जो गलतफहमियां हैं उन्हें दूर कैसे की जाए, इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए संजय गांधी पीजीआई में विशेषज्ञ डॉक्टर मंथन करेंगे। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन पर विमर्श करते हुए प्रदेश की स्थिति के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद एक नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी। इसे सभी मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सालयों को भेजा जाएगा। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। संभव है कि 15 मार्च के बाद इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।
विशेषज्ञों की राय पर तैयार होगी नई रणनीति
पीजीआई की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. उज्ज्वला घोषाल ने बताया कि इस कोरोना वायरस पर सीएमई के जरिये नई गाइडलाइन तैयार करने की योजना है। प्रदेश के मरीजों की स्थिति के अनुसार चिकित्सा सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। अब तक बरती जा रही सावधानियों में कौन सी बात बढ़ाई जा सकती है और इलाज का कौन सा तरीका अपनाना बेहतर रहेगा, इस पर विशेषज्ञ राय देंगे। इसमें माइक्रोबायोलॉजिस्ट, इमरजेंसी मेडिसिन, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, इंफेक्शन कंट्रोल सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ राय देंगे। फिर एक कमेटी सभी के राय के आधार पर गाइडलाइन तय करेगी। इसके लिए प्रदेश के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर इलाज की नई तकनीक पर मंथन किया जाएगा।
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...इसलिए जरूरी है गाइडलाइन
डॉ. घोषाल ने बताया कि कोरोना वायरस के लक्षण सामान्य फ्लू से मिलते-जुलते हैं। इसकी गाइडलाइन तैयार नहीं होने से सर्दी-जुकाम वाले मरीजों में भ्रांतियां रहेंगी। वे लगातार सुपर स्पेशिएलिटी वाले चिकित्सा संस्थानों में पहुंचेंगे। वे खुद परेशान होने के साथ ही चिकित्सा संस्थानों में आने वाले गंभीर मरीजों की परेशानी भी बढ़ाएंगे। एसजीपीजीआई, केजीएमयू व लोहिया संस्थान में कौन-कौन सी सुविधाएं हैं, इसका मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि मरीज की किस तरह की स्थितियों के बाद उसे जिला अस्पताल से हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाए। किन स्थिति में मरीज कहां जाएगा, इसकी भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। किन परिस्थितियों में कौन सी एंटीबायोटिक देनी है, इस पर भी विचार किया जाएगा।
सिर्फ सफाई से रोक सकते हैं संक्रमण
कोरोना वायरस अन्य वायरस की तरह ही है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इसे लेकर दहशत में आने की जरूरत नहीं है। सिर्फ स्वच्छता का ध्यान रखकर इसे फैलने से रोका जा सकता है। लोग मास्क और सेनेटाइजर के लिए भागदौड़ कर रहे हैं, जबकि साबुन-पानी से हाथ धुलते रहने, खांसते व छींकते वक्त मुंह पर रूमाल रखने से भी बचाव किया जा सकता है। कई अध्ययनों में भी यह बात सामने आई है कि हर किसी की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना से लड़ने में कारगर है। सिर्फ सीओपीडी के मरीजों, बुजुर्गों या लंबे समय से इलाज लेने वालों को विशेष एहतियात की जरूरत है।
ये भी जानिए
-शुरुआती लक्षण में नाक बहना, खांसी, गले में खराश, तेज बुखार शामिल है।
-कुछ हद तक निमोनिया जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।
-यह लंग में सूजन बढ़ाने लगता है।
-श्वसन तंत्र में सूजन आने से सांस लेने में परेशानी होती है।
-सांस नहीं ले पाने से शरीर में ऑक्सीजन कम हो जाती है और ऑर्गन फेल की स्थिति बनने लगती है।
-कोरोना वायरस नाक और मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है।
-यह श्वसन तंत्र को डैमेड करता है। सांस लेने में तकलीफ होती है, संक्रमण बढ़ने लगता है।
-फेफड़े के सेल्स को नष्ट करता है।
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