नर्व ब्लॉक तकनीक दिलाएगी दर्द से निजात
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हाथ-पैर, कमर, जोड़ों के असहनीय दर्द से निजात दिलाने में नर्व ब्लॉक तकनीक कारगर साबित हो रही है। सी-आर्म मशीन से देखकर सुई के माध्यम से नर्व में दवा देकर उसे ब्लॉक कर दिया जाता है। इससे दर्द महसूस नहीं होता है। पुराने दर्द में राहत दिलाने की इस तकनीक को नर्व ब्लॉक कहा जाता है।
केजीएमयू के एनॉटमी विभाग में शनिवार को आयोजित कैडवरिक वर्कशॉप फॉर पेन मैनेजमेंट में डॉ. सरिता सिंह ने दी।
एनेस्थीसिया विभाग के पेन मैनेजमेंट यूनिट की प्रभारी डॉ. सरिता सिंह ने बताया कि नर्व ब्लॉक तकनीक उन मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है जो सर्जरी नहीं करा सकते।
इससे जिस अंग में दर्द होता है उसकी नर्व तक आसानी से पहुंच कर सही जगह दवा डाली जाती है। नर्व में दवा देने कारण ये है कि उसी के जरिए संवेदना व दर्द का अनुभव होता है। नर्व को ब्लॉक करने के लिए न्यूरोलेटिक दवाएं दी जाती हैं जो सामान्य दर्द निवारक दवाओं से अलग हैं।
इन दवाओं से शरीर पर कोई कुप्रभाव नहीं पड़ता है। इस तकनीक के जरिए हाथ-पैर, रीढ़ की हड्डी, पेट के दर्द से राहत मिल सकती है। नर्व ब्लॉकिंग तकनीक से मरीज का जीवन आसान हो जाता है और दर्द के साथ जी रहे व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता बढ़ जाती हैं।
नर्व ब्लाकिंग तकनीक का सर्जरी के दौरान भी इस्तेमाल किया जाता है। डॉ. सरिता सिंह ने बताया कि एनॉटमी विभाग में सी-आर्म के जरिए कैडवर में नर्व को ढूंढना और उसे ब्लॉक करना सिखाया गया।
एनॉटमी विभाग में कैडवर पर सिखाए गए गुर
कैडवरिक वर्कशॉप फॉर पेन मैनेजमेंट में जानकारी देते डॉ. विक्रम पटेल, डॉ. सरिता सिंह और डॉ देवेद्र सिंह। यूएसए के फीनिक्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट के डॉ. विक्रम पटेल ने बताया कि कमर या घुटने के दर्द के कारण चलना-फिरना दूभर हो जाता है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है।
घुटने के अंदर नर्व में एक इंजेक्शन लगाकर दर्द से निजात दिलाई जा सकती है। आस्टियो आर्थराइटिस के मरीजों की जिंदगी दर्द से तड़पते हुए बीत जाती है। न तो वो चल पाते हैं और न ही उठ-बैठ। जिनके पास पैसा है वो लाखों रुपये खर्च कर घुटना बदलवा लेते हैं।
जबकि गरीब मरीज की जिंदगी इस दर्द से प्रभावित हो जाती है। उन्होंने बताया कि आर्थराइटिस के मरीज के घुटने में इंट्राआर्ट्रीकुलर नर्व ब्लॉक कर दर्द से निजात दिलाई जा सकती है। इससे मरीज को लंबे समय तक दर्द से निजात मिल जाती है।
इन बिमारियों में भी मिलेगी राहत
इसके अलावा डिस्क प्रोलैप्स, स्लिप डिस्क या फिर स्पांडिलाइटिस के मरीजों को भी दर्द से निजात दिलाई जा सकती है। कमर के दर्द के मरीज में सबसे कारगर उपाय उस नर्व को ब्लॉक करना है जिससे दर्द पैदा हो रहा है। इसमें मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर इपीड्यूरल नर्व ब्लॉक कर देते हैं।
इसका असर 90 से 100 फीसदी होता है और मरीज को आराम मिल जाता है। सी-आर्म की सहायता से डिस्क की नर्व को देखकर ब्लॉक किया जाता है। ट्रांसक्यूटीनियस नर्व स्टिमुलेटर में डिस्क के ऊपर से मशीन लगाते हैं। जिससे नर्व को स्टिमुलेट करते हैं। इस तकनीक से उन मरीजों को ज्यादा फायदा होता है जिन्हें अधिकतर चिक चले जाने की दिक्कत होती है।
इसके अलावा रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेजन में डिस्क को सिकोड़ दिया जाता है। जिससे वह नर्व से दबाव हट जाता है और मरीज को दर्द से आराम मिल जाता है। इस मौके पर सहारा हॉस्पिटल के पेन मैनेजमेंट एक्सपर्ट डॉ. देवेंद्र सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को सहारा हॉस्पिटल में वर्कशॉप का आयोजन किया गया था। रविवार को कैंसर मरीजों के दर्द के प्रबंधन पर जानकारी दी जाएगी।