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यूपी के राज्यपाल ने नेहरू पर दिया बड़ा बयान

Thu, 26 Nov 2015 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 26 Nov 2015 10:41 PM IST
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Nehru was not working according to constitution says UP governor.

राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को महात्मा गांधी के कहने पर पं. जवाहर लाल नेहरू ने केंद्र सरकार में मंत्री बनाया था, जबकि दोनों ही कांग्रेसी नहीं थे।

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गांधी चाहते थे कि पहला मंत्रिमंडल राष्ट्रीय स्वरूप का रहे। पं. नेहरू चूंकि  डॉ. अंबेडकर की विचारधारा के अनुरूप काम नहीं कर रहे थे, इसीलिए उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। अंबेडकर ने संविधान के निर्माण में उसी तरह महाप्रयास किया जैसे भगीरथ ने धरती पर गंगा के अवतरण के लिए किया था।
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नाईक बृहस्पतिवार को विधानभवन के सामने डॉ. अंबेडकर महासभा के कार्यालय में संविधान दिवस पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर की तारीख दो कारणों से महत्वपूर्ण है। 1949 में इसी दिन संविधान निर्माण का काम पूरा हुआ था और इसी दिन 2008 में आतंकवादियों ने मुंबई में हमला किया था। आतंकियों ने सोच-समझकर देश को तोड़ने के लिए वही दिन चुना जिस दिन संविधान बना था।
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राज्यपाल ने कहा, संविधान का निर्माण 11 सत्रों में दो साल 11 महीने 18 दिन की बहस के बाद पूरा हुआ था। संविधान में स्वतंत्रता, जनतंत्र, समानता, मौलिक अधिकार, कर्तव्य, विधानमंडल, संसद, न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका बाबा साहब की देन हैं। इन संस्थाओं के लिए संविधान दीप स्तंभ की तरह है।

मोदी ने घोषित किया संविधान दिवस

Nehru was not working according to constitution says UP governor.

नाईक ने 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। कहा कि वे प्रधानमंत्री से आग्रह करेंगे संविधान सभा की बहस हिंदी में भी उपलब्ध हो। इससे पहले राज्यपाल ने डॉ. अंबेडकर के अस्थि कलश पर पुष्पांजलि अर्पित की।

डॉ. अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था डॉ. अंबेडकर के बिना संभव नहीं थी।

संविधान की सलाहकार समिति ने नौकरियों में आरक्षण को रद्द कर दिया था। प्रीता हरित ने कहा कि संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, वह खराब ही रहेगा यदि इसे लागू करने वाले ईमानदार और चरित्रवान न हों। प्रो. रामनरेश चौधरी ने कहा कि संविधान बनाने का काम संविधान सभा ने ड्राफ्ट कमेटी को सौंपा था। डॉ. अंबेडकर इसके चेयरमैन थे। इसमें कुल 7 सदस्य थे।

संविधान से समझौता नहीं
नाईक ने कहा कि राज्यपाल के रूप में उनका 16 महीने का कार्यकाल हो गया है। इसका मूल्यांकन तो प्रदेश के लोग करेंगे, लेकिन जहां संविधान की बात आती है, वे कोई समझौता नहीं करते। वे अपने ढंग से काम करते हैं। जनतंत्र इसीलिए बना है। संविधान में स्वतंत्रता की भी कुछ मर्यादाएं हैं।

संविधान की हिंदी में हस्तलिखित प्रति भेंट की

Nehru was not working according to constitution says UP governor.

राज्यपाल ने डॉ. भीमराव अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल को संविधान की हिंदी में रूपांतरित हस्तलिखित मूल प्रतिलिपि भेंट की।

इस पर संविधान सभा के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। इस मूल प्रति के प्रत्येक चैप्टर में भगवान राम, भगवद्गीता, गौतम बुद्ध, अशोक और महात्मा गांधी आदि के सुंदर चित्र हैं।

आर्थिक-सामाजिक असमानता कब तक?
हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस खेमकरन ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने सचेत किया था कि सामाजिक प्रजातंत्र की बुनियाद के अभाव में राजनीतिक प्रजातंत्र ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगा।

यह विचार करने की जरूरत है कि तमाम प्रावधानों के बावजूद आर्थिक, सामाजिक असमानता कितनी दूर कर पाए हैं?

इसमें कितना वक्त और लगेगा? यदि यही रफ्तार रही तो गरीब, वंचित और शोषित समाज संयम नहीं रख पाएगा। वह संविधान को नुकसान पहुंचा सकता है।

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