यूपी में अत्याचार से पीड़ित दलितों पर ही दर्ज हो रही है क्रॉस एफआईआर: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलित अत्याचार के मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही। पुलिस उल्टे पीड़ित दलितों के खिलाफ ही क्रॉस एफआईआर दर्ज कर लेती है।
कठेरिया बृहस्पतिवार को यहां योजना भवन में मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि दलितों की हत्या और बलात्कार की घटनाओं में 60 दिन में चार्जशीट दाखिल करने का नियम है, लेकिन 200 से अधिक ऐसे मामलों में एक साल बाद भी अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई।
वहीं, पीड़ित दलितों को समय पर मुआवजा नहीं मिलने से भी कठिनाई होती है। योगी सरकार में अब मुआवजा मिलना शुरू हुआ है। दलितों के प्रति अत्याचार में हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल आगे हैं, लेकिन जनसंख्या की अनुपात में जब हम देखते हैं तो यूपी का नंबर पीछे चला जाता है।
दलितों के विकास के लिए मिले 4732 करोड़ नहीं किए खर्च
कठेरिया ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं में अनुसूचित जाति के विकास के लिए विशेष फंड दिया जाता है, लेकिन यूपी में दस विभागों ने उस फंड में से 4732 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए। बेसिक शिक्षा विभाग ने 670 करोड़, लोक निर्माण विभाग ने 1354 करोड़ और ग्रामीण विकास विभाग ने 1166 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए। प्रदेश में अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बिजली संकट है। कहीं बिजली के तार नहीं हैं तो कहीं ट्रांसफार्मर नहीं हैं, पर ऊर्जा विभाग ने 337 करोड़ खर्च नहीं किए।
पॉक्सो एक्ट के पीड़ितों को मिले आर्थिक मदद
कठेरिया ने कहा कि अन्य प्रदेशों में पॉक्सो एक्ट के पीड़ितों को आर्थिक मदद दी जाती है, जबकि यूपी में ऐसा नहीं है। उन्होंने सरकार को इसके लिए पत्र लिखा है।
सीवरेज की सफाई में मारे गए लोगों को मुआवजा नहीं दिया
कठेरिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार सीवर लाइन की सफाई के दौरान मृत्यु होने पर दलित व्यक्ति के परिवार के सदस्य को नौकरी, 10 लाख रुपये मुआवजा, बच्चों को निशुल्क शिक्षा और आवास देने का प्रावधान है। बुधवार को राजधानी में दलित बस्ती का जायजा लेने पर सामने आया कि सीवर की सफाई के दौरान दस दलितों की मृत्यु हुई, लेकिन उन्हें मुआवजा या अन्य मदद नहीं मिली। आयोग ने मृतकों के परिवार को मदद दिलाने के लिए सूची मांगी है।
लखनऊ मंडल के अफसर योजनाओं से नावाकिफ
कठेरिया ने कहा कि बुधवार को लखनऊ मंडल की समीक्षा के दौरान सामने आया कि अफसरों को दलित विकास योजना, दलित अपराध नियंत्रण कानून और मुआवजे तक की जानकारी नहीं है।
छात्रवृत्ति की रकम के लिए केंद्र को लिखेंगे
कठेरिया ने कहा कि राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को इस वर्ष की छात्रवृत्ति का भुगतान तो कर दिया है, लेकिन केंद्र सरकार से 1500 करोड़ नहीं मिलने से उन्हें गत वर्षों की छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है। छात्रवृत्ति की राशि आवंटित करने के लिए केंद्र को पत्र लिखा जाएगा।
मायावती नहीं हैं दलित हितैषी
कठेरिया ने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती खुद ही दलित हितैषी नहीं हैं। यदि वे दलित हितैषी होतीं तो दलितों की स्थिति कुछ और होती।