यूपी: पहले किया रेप, अब दे रहे मुआवजा
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राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने राज्य सरकार से सिफारिश की है कि मुजफ्फरनगर में दंगों के बाद तीन महीने से ज्यादा समय से गायब लोगों के परिवारीजनों को उत्तराखंड त्रासदी की तर्ज पर मुआवजा दिया जाए।
अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन नसीम अहमद व सदस्य प्रो. फरीदा अब्दुल्ला खान ने सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर मुजफ्फरनगर व सहारनपुर दंगों की जांच रिपोर्ट सौंपी।
नसीम अहमद ने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों में इस कदर डर बैठा हुआ है कि वे अपने गांव लौटना नहीं चाहते हैं। फुगाना गांव की बलात्कार पीड़ित युवतियों पर लगातार मुकदमे वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
उनसे कहा जा रहा है कि सरकार जितना मुआवजा देगी, उससे दोगुना मुआवजा उन्हें दिया जाएगा। आयोग ने मुख्यमंत्री से इन्हें संरक्षण प्रदान करने के लिए कहा है।
मुआवजा देने में हुई अनियमितता
नसीम अहमद व प्रो. फरीदा अब्दुल्ला खान ने कहा कि दंगे के बाद से गायब हो गए लोगों की सूची बनाई जाए और तीन महीने से अधिक समय से गायब लोगों के परिवारीजनों को उत्तराखंड त्रासदी की तरह मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि कई घर ऐसे थे जहां तीन-तीन चूल्हे जलते थे, लेकिन सरकार ने एक को ही मुआवजा दिया है। ऐसे में सभी को मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि कई दंगा पीड़ित अपने गांव लौटना चाहते हैं लेकिन उन्हें गांव के ही लोग धमका रहे हैं। पुलिस भी धमकी देने वालों के साथ है। ऐसे लोगों को गांव लौटने के लिए सरकार को संरक्षण देना चाहिए।
दंगा पीड़ितों की मदद करेंगे अखिलेश
मुख्यमंत्री ने आयोग से कहा कि वे नए सिरे से इनकी समीक्षा करवाएंगे। उन्होंने प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को निर्देश दिए कि दंगा पीड़ितों को धमकाकर मुकदमे वापस लेने के लिए दबाव बना रहे लोगों के साथ सख्ती की जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दंगे में गायब हो चुके लोगों को मुआवजा देने के लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आयोग को आश्वासन दिया कि दंगा पीड़ितों के मुकदमे लड़ने के लिए अच्छे अधिवक्ताओं का पैनल बनाया जाएगा।
इसमें मुजफ्फरनगर में काम कर रहे एनजीओ के सुझाव भी शामिल किए जाएंगे। इस मौके पर आयोग के सचिव सुरजीत सिंह के अलावा प्रमुख सचिव गृह नीरज गुप्ता, डीजीपी आनंद लाल बनर्जी भी उपस्थित थे।
उच्च स्तरीय आयोग करे सहारनपुर मामले की जांच
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य प्रो. फरीदा अब्दुल्ला खान व डॉ. अजायब सिंह की ओर से 31 जुलाई को सहारनपुर का दौरा कर तैयार की गई रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री को पेश की गई। इसमें सरकार से छह बिंदुओं पर सिफारिश की गई है।
इसमें सहारनपुर मामले की जांच उच्च स्तरीय आयोग बनाकर कराने, जिला प्रशासन से वहां हुए नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण कराने, इस मामले में गिरफ्तार निर्दोष लोगों को तत्काल रिहा करने तथा दोषियों को सजा देने की सिफारिश की गई है।
चुनाव के कारण हो सकता है सांप्रदायिक तनाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वहां दो महीने में विधानसभा उपचुनाव होने हैं, ऐसे में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किए जाएं।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सिख व मुस्लिम समुदाय के प्रमुख लोगों को शामिल कर एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जो जमीन विवाद का निपटारा करे। आयोग ने कहा कि वहां जो उपद्रव हुआ उसमें बाहरी लोगों का हाथ है। सरकार को ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों से भी मिले
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य प्रो. फरीदा अब्दुल्ला खान व सचिव सुरजीत सिंह ने यहां वीवीआईपी अतिथि गृह में प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों से भी मुलाकात कर स्थिति की समीक्षा की। मिलने वालों में सदस्य सुहेल अयूब, नीलम रोमिला, रेब्बा सिंह व आयोग के सचिव मो. मारूफ प्रमुख थे।