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भला ऐसी बहादुर बिटिया पर किसी को नाज क्यों न हो...
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 25 Jan 2014 10:30 AM IST
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माल ब्लॉक के गांव टिकरीकला बदईया के लोग इस समय बेसब्री से बहादुर बिटिया मौसमी के परिजनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
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हर घर, हर गली में इस समय बस मौसमी की ही चर्चा है। जहां भी गांव के लोग एक साथ खड़े होते हैं बस मौसमी की बात शुरू हो जाती है।
कोई उसे बहादुर कहता है तो कोई गांव की शान। गांव में किसान बेगी सिंह अपने परिचितों से मौसमी की बातें करते नहीं थकते। मौसमी का नाम आते ही उनके चेहरे पर जहां उसके जाने का गम होता है, वहीं इस बात की भी खुशी है कि उसकी वीरता को सम्मान दिया जा रहा है।
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इनके अनुसार सरकार की ओर से मौसमी को सम्मानित किया जाना पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। गांव के ही किसान सुखपाल कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी बहादुर लड़की नहीं देखी।
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उनके अनुसार मौसमी जितनी बहादुर थी उतना ही अपने से बड़ों को सम्मान देती थी। यही कारण था कि गांव में हर कोई उसे अपनी बेटी की तरह मानता था।
मौसमी की भाभी रजनी ने बताया कि वह उसे अपनी बहन की तरह मानती थीं। उनको अपनी बहन के जाने का अफसोस है, लेकिन उसने जिस बहादुरी का परिचय दिया उसका फख्र भी।
मौसमी की वीरता के लिए उसके भाई को 27 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित करेंगे।
इसी के लिए मौसमी के पिता रामस्वरूप, मां बुधाना और भाई मनोज दिल्ली गए हैं। याद रहे, 10 वर्षीय मौसमी ने मई 2013 में अपनी सहेली को डूबने से बचाने में जान गंवाई थी।