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नन्हेलाल के जज्बे को सलाम, 68 साल की उम्र में बच्चों के बीच बैठकर दे रहे हैं एग्जाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 01 Nov 2018 11:52 AM IST
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बच्चों के बीच बैठकर परीक्षा देते नन्हेलाल
- फोटो : amar ujala
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अमेठी जिले के मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के दादरा गांव के नन्हेलाल का 68 वर्ष की आयु में परिषदीय विद्यालय में पढ़ाई करना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है। परिषदीय स्कूलों में चल रही छमाही परीक्षा में बैठे नन्हेंलाल को देखकर हर कोई उनके जज्बे की तारीफ कर रहा है।
नन्हेलाल ने बताया कि करीब तीन साल पहले वे दादरा गांव के जूनियर हाईस्कूल के पास ही बाग में जानवर चरा रहे थे। उस समय स्कूल में बच्चों को पढ़ता देख उनके मन में भी पढ़ने की ललक जगी थी। नन्हेलाल शिक्षक असगर के पास पहुंचे और स्कूल में नाम लिखाने की जिद की।
नामांकन में उम्र की बाधा आड़े आ रही थी इसलिए शिक्षक ने बगैर नाम लिखे ही पढ़ने के लिए आने की अनुमति उन्हें उच्चाधिकारियों की मौखिक सहमति के बाद दे दी। इस बार वे कक्षा आठ की छमाही परीक्षा दे रहे हैं।
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नन्हेलाले की पढ़ने की ललक को देखकर बीते साल बीएसए और डीएम उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। उन्हें पढ़ाने वाले परिषदीय विद्यालय के शिक्षक मोहम्मद असगर कहते हैं कि अनपढ़, निरक्षर अभिभावकों और गांव के लोगों को नन्हेंलाल से प्रेरणा लेनी चाहिए।
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नन्हेलाल ने बताया कि करीब तीन साल पहले वे दादरा गांव के जूनियर हाईस्कूल के पास ही बाग में जानवर चरा रहे थे। उस समय स्कूल में बच्चों को पढ़ता देख उनके मन में भी पढ़ने की ललक जगी थी। नन्हेलाल शिक्षक असगर के पास पहुंचे और स्कूल में नाम लिखाने की जिद की।
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नामांकन में उम्र की बाधा आड़े आ रही थी इसलिए शिक्षक ने बगैर नाम लिखे ही पढ़ने के लिए आने की अनुमति उन्हें उच्चाधिकारियों की मौखिक सहमति के बाद दे दी। इस बार वे कक्षा आठ की छमाही परीक्षा दे रहे हैं।
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नन्हेलाले की पढ़ने की ललक को देखकर बीते साल बीएसए और डीएम उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। उन्हें पढ़ाने वाले परिषदीय विद्यालय के शिक्षक मोहम्मद असगर कहते हैं कि अनपढ़, निरक्षर अभिभावकों और गांव के लोगों को नन्हेंलाल से प्रेरणा लेनी चाहिए।