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स्मार्ट सिटी कॉन्फ्रेंस के लिए नहीं आए मेहमान, अब नगर निगम के गले पड़ा होटल का बिल

Mon, 06 Aug 2018 04:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 06 Aug 2018 04:40 PM IST
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nagar nigam to pay the bill of rooms booked for smart city conference
नगर निगम - फोटो : amar ujala

लखनऊ में जुलाई में हुई स्मार्ट सिटी कॉन्फ्रेंस के लिए देशभर से 700 मेहमान बुलाए गए थे। जो आए उनसे तो नगर निगम ने होटल का बिल भरवा लिया, पर जो नहीं आए उनका बिल नगर निगम की मुसीबत बन गया है।

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एक अनुमान के अनुसार करीब 40 लाख रुपये का भुगतान नगर निगम को होटल वालों को करना है। होटल वाले नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। फिलहाल नगर निगम ने साफ कह दिया कि जो उचित होगा, उतना ही भुगतान किया जाएगा। 
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प्रदेश में निवेश और र्स्माट सिटी की योजनाअेां को शुरू करने के लिए 27  से 29 जुलाई को राजधानी में राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस हुई। इसे ग्राउंउ ब्रेकिंग सेरेमनी का नाम दिया गया था। इसमेें करीब 700 मेहमान बुलाए गए थे, जिसमें कई बड़े उद्योगपति और कंपनियों केप्रतिनिधियों के अलावा नगर निगमों के महापौर, नगर पालिका परिषदों केअध्यक्ष, नगर आयुक्त अन्य प्रशासनिक अफसर शामिल थे।
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महापौर और नगर आयुक्तों के ठहराने का जिम्मा और उनके लिए गाड़ियों का इंतजाम करने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई थी। उसको लेकर नगर निगम की ओर से शहर के प्रमुख आलीशान होटलों में बुकिंग कराई गई थी।

8 से 10 हजार हर दिन का किराया

nagar nigam to pay the bill of rooms booked for smart city conference
देश भर में 100 स्मार्ट सिटी हैं। इनके महापौर और सीईओ को बुलाया गया था। नगर निगम ने दस प्रतिशत एडवांस देकर कमरे बुक कराए। सीईओ तो दो-चार को छोड़ सभी आए पर महापौर करीब 40 ही आए। इनका बिल करीब 15 लाख रुपये का बना है। 

भारत सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़े अफसरों और सभी प्रदेशों से नगरीय विकास के प्रमुख और सचिव स्तर के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। 80 कमरे बुक कराए गए थे, 30 कमरे खाली रह गए। कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग सेक्टर के विशेषज्ञ आए थे। इनके लिए 86 कमरे बुक थे, पर आए 60। खाली कमरों का बिल भी नगर निगम को भेजा गया है। 

अलग-अलग होटलों जो कमरे बुक कराए गए थे, उनका एक दिन का किराया करीब 10 हजार रुपये है। इस तरह तीन दिन के लिए बुक हर कमरे का बिल करीब तीस हजार रुपये बना है। सूत्रों का कहना है कि  नगर निगम को करीब चालीस लाख रुपये का भुगतान होटलों को करना है।

सरकार से 20 लाख रुपये मिले थे, उनमें से 13 लाख का भुगतान कर दिया गया है। प्रदेश सरकार से और पैसा मिलने वाला है। जो कमरे खाली रह गए उस बारे में होटल वालों से पहले की कह दिया गया था कि वह मेहमान से कॉन्टेक्ट कर कंफर्म कर लें, यदि वह किसी कारण न आ पाएं तो किसी और को कमरा बुक कर दें। कुछ होटलों में कई महापौर ने किराया अधिक होने के कारण कमरा नहीं लिया और सस्ते होटल में चले गए। इसमें नगर निगम क्या कर सकता है। कमरे होल्ड कराने का यह मतलब नहीं है कि जो कमरे खाली रह गए उसका भी पैसा नगर निगम दे। जो उचित है वही पैसा दिया जाएगा। - इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त
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