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लखनऊ में पुरानी जनगणना के आधार पर ही होगा ओबीसी का रैपिड सर्वे

Tue, 02 Aug 2022 02:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Aug 2022 02:06 AM IST
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nagar nigam lucknow start rapid survey of obc
लखनऊ। वार्डों के परिसीमन के बाद अब उनका आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ी जाति की गणना होगी। इसके लिए रैपिड सर्वे शुरू हो रहा है। यह सर्वे साल 2011 की जनगणना के आधार पर ही होगा। ऐसे में रैपिड सर्वे से आबादी बढ़ने को लेकर जो विवाद था वह दूर हा गया है। सर्वे में सिर्फ उन्हीं की गणना की जाएगी जिनका जन्म या मृत्यु एक जनवरी 2011 तक हुआ है। सर्वे का काम 10 दिन मेें पूरा किया जाना है।
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रैपिड सर्वे कैसे किया जाएगा, इसके लिए शासन से दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सर्वे के दौरान जिस मकान में ओबीसी मिलेंगे वहां पर गेरू रंग से ‘प’ लिखा जाएगा। नगर निगम चुनाव में कौन से वार्ड ओबीसी में आरक्षित होंगे यह रैपिड सर्वे के बाद ही तय होगा। साल 2011 में हुई जनगणना में ओबीसी के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए थे। इसी कारण साल 2017 में हुए नगर निगम चुनाव में ओबीसी सीटों का आरक्षण रैपिड सर्वे के बाद ही तय किया गया था। अब साल 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन नहीं हो पाई। इसके कारण इस बार भी चुनाव 2011 की जनगणना पर हो रहा है। नगर निगम सीमा में 88 गांव जुड़ने के कारण नए सिरे से रैपिड सर्वे की जरूरत पड़ी है।
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सर्वे में लगेंगे 500 कर्मचारी
ओबीसी की आबादी का सर्वे करने के लिए सभी 110 वार्डों में करीब 500 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। ये कर्मचारी हर वार्ड में जाकर ओबीसी व्यक्तियों की गणना करेंगे। इसके आधार पर तय होगा कि किस वार्ड में ओबीसी की आबादी कितनी है। उसी के आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा।
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पुरानी आबादी के आधार पर ही होगा सर्वे
रैपिड सर्वे को लेकर एक अधिकारी ने बताया कि सर्वे 2011 की आबादी के आधार पर ही होना है। ऐसे में उस समय की आबादी में शामिल परिवार या व्यक्ति परिसीमन के बाद अब किस वार्ड का हिस्सा हैं, कहीं दूसरी जगह चले गए हैं या उनकी मृत्यु हो गई है, यह सब विवरण अपडेट किया जाएगा। यदि एक जनवरी 2011 के बाद किसी का जन्म हुआ है तो ऐसे लोगों की संख्या ओबीसी की सीटों के आरक्षण पर कोई असर नहीं डालेगी।

पिछले आदेश पर हुआ था विवाद, अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
पिछले महीने रैपिड सर्वे का जो आदेश हुआ था, उसमें यह नहीं बताया गया था कि यह 2011 की जनगणना के आधार पर ही करना है। ऐसे में यह विवाद उठा था कि यदि ओबीसी की नए सिरे से गणना हुई तो नगर निगम की कुल आबादी बढ़ जाएगी। पार्षदों ने सवाल उठाया था कि जब अन्य वर्गों की आबादी 2011 की ली जा रही है तो ओबीसी गणना नए सिरे से क्यों कराई जा रही है। ऐसा हुआ तो ओबीसी की आबादी बढ़ना तय है। इसके बाद रैपिड सर्वे का काम ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। वहीं, पिछली बार जब रैपिड सर्वे का आदेश हुआ था तब वार्डों के परिसीमन का प्रस्ताव भी प्रकाशित नहीं हुआ था। नियम के तहत रैपिड सर्वे परिसीमन का प्रकाशन होने के बाद ही किया जाना चाहिए। इस बार आदेश से पहले वार्डों के परिसीमन का प्रकाशन भी हो चुका है।
साल 2017 में हुए सर्वे में इन वार्डों में सबसे ज्यादा थे ओबीसी
बालागंज-10734
फैजुल्लागंज प्रथम-10286
केसरी खेड़ा-9105
सरोजनी नगर प्रथम-8114
शहीद भगत सिंह-8842
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