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नगर निगम ने बेचने के बजाय बर्बाद होने के लिए छोड़ दीं दुकानें

Sat, 27 Mar 2021 10:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Mar 2021 10:52 PM IST
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nagar nigam left shops
नगर निगम ने बर्बाद होने के लिए छोड़ दीं दुकानें। - फोटो : ??? ?????
लखनऊ। जिन नई दुकानों को बेचने से नगर निगम को दो करोड़ रुपये मिल सकते हैं, उन्हें बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया गया है। चार साल से अधिक समय से 16 दुुकानों का कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनकर तैयार है, पर दुकानें नहीं बेची जा रहीं। करीब चार साल पहले योजना लॉन्च करते समय जिन्होंने पंजीकरण कराया था, उन्हें भी आवंटन नहीं किया गया और पंजीकरण निरस्त कर दोबारा खोला भी नहीं गया। ऐसे में जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद हो रहा है, पर जिम्मेदारों को इसकी परवाह नहीं है।
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आशियाना स्थित बिजनौर रोड पर नगर निगम का जोन आठ कार्यालय है। वर्ष 2016 में तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खान ने मल्टीस्टोरी आवासीय योजनाओं के साथ जोन आठ कार्यालय में 16 दुकानों के कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स को भी लॉन्च किया था। सत्ता बदली तो 2017 में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने योजना को फिर लॉन्च कर पंजीकरण खोला। दुुकानों के लिए करीब 50 लोगों ने पंजीकरण कराया, पर इन्हें दुकानों का आवंटन नहीं किया गया। इस पर लोगों ने पैसा वापस ले लिया। तीन सालों से दुकानों की आवंटन प्रक्रिया ठप है। वहीं, करोड़ों की लागत से तैयार कॉम्प्लेक्स बदहाल हो रहा है।
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30 साल की लीज पर होना था आवंटन
जब दुुकानों का पंजीकरण खोला गया था तब इन्हें 30 साल की लीज पर आवंटित करने का प्रावधान था। इसमें भूतल में बनी दुकानों की प्रीमियम राशि 12.50 लाख रुपये तय की गई थी। प्रथम तल की दुकानों की प्रीमियम राशि 10.20 लाख थी। 260 वर्गफीट की किराया नगर निगम की ओर से तय गृहकर की दर से पांच गुना लिया जाना था।
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अमीनाबाद में किराये की दुकानें बेचने की जल्दी
एक ओर नगर निगम इन 16 दुकानों को न बेचकर बर्बाद कर रहा है, वहीं अमीनाबाद में मोहन मार्केट की 300 से अधिक दुकानें बेेचने की तैयारी है। एक वर्ग विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए यह काम इतनी तेजी में हो रहा है कि तीन महीने में ही प्रस्ताव पास कर कमेटी भी बना ली गई। बकाया किराया जमा करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। इसमें उन अवैध कब्जेदारों को भी वैध कर दुकानें बेचने की तैयारी है जो शिकमी किरायेदार हैं या जिन्हें मूल आवंटी फर्जी तरीके से पैसा लेकर कब्जा देकर चले गए। इसे लेकर कई पार्षद विरोध भी कर रहे, पर उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं महापौर संयुक्ता भाटिया का कहना है कि दुकानों के पहले तय किए गए रेट कम थे। इन्हें फिर से संशोधित किया जा रहा है। जल्द ही पंजीकरण खोलकर दुकानों का आवंटन कर दिया जाएगा।

नगर निगम ने बेचने के बजाय बर्बाद होने को छोड़ दीं दुकानें।

नगर निगम ने बेचने के बजाय बर्बाद होने को छोड़ दीं दुकानें।

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