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Lucknow News: बसंत पंचमी पर तीन घंटे रहेगा मां सरस्वती की पूजा का मुहूर्त
Wed, 25 Jan 2023 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 25 Jan 2023 12:48 AM IST
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अयोध्या। मां सरस्वती देवी की पूजा-अर्चना का पर्व बसंत पंचमी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। पूजा का मुहूर्त इस बार तीन घंटे 21 मिनट रहेगा। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू में स्नान को उमड़ेंगे। मंंदिरों में भगवान को अबीर-गुलाल भी अर्पित किया जाएगा, अन्य अनुष्ठान होंगे।
मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को देवी मां की कृपा से बुद्धि और विद्या का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन केवल घरों में ही नहीं, शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती की पूजा आयोजित की जाएगी।
आचार्य शिवेंद्र ने बताया कि बसंत पंचमी 25 की दोपहर से ही लग रही है, लेकिन वैष्णव समाज में उदयातिथि की मान्यता है। इसलिए त्योहार 26 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन चार शुभ योग बन रहे हैं। शिव योग, सिद्ध योग, सर्वार्थ सिद्ध योग और रवि योग। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ये चार योग बहुत ही शुभ और फलदायी होते हैं। इस योग में किए जाने वाले हर एक कार्य सिद्ध होते हैं। बताया कि इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है। बड़ी संख्या में भक्त रामनगरी में पावन सरयू में स्नान भी करते हैं। मठ-मंदिरों में भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है, विभिन्न अनुष्ठान होते हैं।
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पंचमी पर इस तरह करें पूजन
आचार्य शिवेंद्र ने पूजा विधि के बारे में बताया कि सुबह जल्दी उठकर, घर की साफ-सफाई कर मां सरस्वती की विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना करें। इस दिन पीला वस्त्र धारण कर पीला चंदन माथे पर लगाना चाहिए। इससे मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं। तरक्की के लिए ऊं वद-वद वाग्वादिनी स्वाहा...मंत्र का जप करें। परीक्षा में सफलता के लिए ऊं एकदंत महाबुद्धि सर्व सौभाग्यदायक सर्वसिद्धि करो देव गौरी पुत्र विनायक...मंत्र का जप करें। वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा करने का भी विधान है।
पूजा का मुुहुर्त बसंत पंचमी प्रारंभ- 25 जनवरी 12:34 बजे
समापन-26 जनवरी 10:28 बजे तक
पूजा मुहूर्त- 26 जनवरी- सुबह 07:07 बजे से 10:28 बजे तक
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मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को देवी मां की कृपा से बुद्धि और विद्या का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन केवल घरों में ही नहीं, शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती की पूजा आयोजित की जाएगी।
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आचार्य शिवेंद्र ने बताया कि बसंत पंचमी 25 की दोपहर से ही लग रही है, लेकिन वैष्णव समाज में उदयातिथि की मान्यता है। इसलिए त्योहार 26 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन चार शुभ योग बन रहे हैं। शिव योग, सिद्ध योग, सर्वार्थ सिद्ध योग और रवि योग। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ये चार योग बहुत ही शुभ और फलदायी होते हैं। इस योग में किए जाने वाले हर एक कार्य सिद्ध होते हैं। बताया कि इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है। बड़ी संख्या में भक्त रामनगरी में पावन सरयू में स्नान भी करते हैं। मठ-मंदिरों में भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है, विभिन्न अनुष्ठान होते हैं।
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पंचमी पर इस तरह करें पूजन
आचार्य शिवेंद्र ने पूजा विधि के बारे में बताया कि सुबह जल्दी उठकर, घर की साफ-सफाई कर मां सरस्वती की विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना करें। इस दिन पीला वस्त्र धारण कर पीला चंदन माथे पर लगाना चाहिए। इससे मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं। तरक्की के लिए ऊं वद-वद वाग्वादिनी स्वाहा...मंत्र का जप करें। परीक्षा में सफलता के लिए ऊं एकदंत महाबुद्धि सर्व सौभाग्यदायक सर्वसिद्धि करो देव गौरी पुत्र विनायक...मंत्र का जप करें। वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा करने का भी विधान है।
पूजा का मुुहुर्त बसंत पंचमी प्रारंभ- 25 जनवरी 12:34 बजे
समापन-26 जनवरी 10:28 बजे तक
पूजा मुहूर्त- 26 जनवरी- सुबह 07:07 बजे से 10:28 बजे तक