‘मुस्लिम गीता पढ़े और हिंदू कुरान तो खत्म हो जाएंगे फसाद’
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक ने साम्प्रदायिक फसाद को नामसझी की वजह बताते हुए कहा कि जिस दिन इंसान एक-दूसरे को समझ लेगा फसाद अपने आप खत्म हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि एक-दूसरे के मजहब को समझने के लिए जरूरी है कि हिंदू कुरान पढ़े और मुसलमान गीता पढ़कर जानकारी हासिल करे। डॉ सादिक शनिवार को दीन-ए-इस्लाम और आतंकवाद विषयक मजलिस को खिताब कर रहे थे।
इजहार आब्दी की मेजबानी में पीर बुखारा स्थित अजाखाना में आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए डा. सादिक ने कहा कि इस्लाम से आतंकवाद का कोई संबंध नही है। कुरान में कहा गया है कि जिस जगह पर इस्लामी निजाम होगा वहां पर जुल्म नही होगा।
'नमाज तभी कुबूल होगी जब किसी पर जुल्म न हो'
जिस जगह पर जुल्म व अत्याचार हो समझ लो वहां पर अल्लाह का निजाम नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्लाम का निजाम ही दुनियां से जुल्म का खात्मा करना है। उन्होंने कहा कि बेगुनाहों पर जुल्म और उनका खून बहाने का नाम ही आतंकवाद है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में इस्लामी तालीम की कमी होगी वहां पर जुल्म और अत्याचार बढ़ता जाएगा।
डॉ. सादिक ने कहा कि इंसान की नमाज तभी कुबूल होगी जब नमाज पढ़ने वाला किसी दूसरे पर जुल्म न कर रहा हो। उन्होंने कहा कि इस्लाम में जेहाद का जिक्र किया गया है लेकिन आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है।
डॉ. सादिक ने कहा कि जेहाद के मायने ही जुल्म का खात्मा है। डॉ. सादिक ने कहा कि अपने मजहब को जरूरत से ज्यादा दूसरों के सामने दिखाने वाला मजहबी नहीं होता। मजलिस के बाद अंजुमन नय्यरे इस्लाम, अंजुमन मेराजुल इस्लाम और अंजुमन गुंचा-ए-मेंहदिया ने नौहाख्वानी व सीनाजनी कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। नौहाख्वानी का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।