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सुरों ने मिटाया मीलों का फासला
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 17 Sep 2014 12:23 PM IST
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उमड़ते-घुमड़ते मेघों सी गर्जना तो कभी ताल से ताल मिलाकर चलते घोड़ों की चाल। घाटियों में गूंजती कोयल की कूक के साथ युद्ध के मैदान में बजती रणभेरी।
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एक साथ 17 वाद्य यंत्रों के साथ निकले संगीत के जादुई सुरों ने मंगलवार शाम संगीत के चाहने वालों को 70 मिनट तक अपने मोह में बांधे रखा।
उत्तर से दक्षिण तक के पांच राज्यों की प्रस्तुतियों को एकाकार करती ताल यात्रा मंगलवार शाम नगर से गुजरी तो एक क्षण को समां ठहर सा गया।
कलाकार शेख इब्राहिम के साथ पांच प्रदेशों के कलाकारों ने एक मंच पर संगीत की छठा बिखेरी।
उप्र संगीत नाटक अकादमी संत गाडगे जी प्रेक्षागृह में आयोजित ‘ताल यात्रा रिद्म ऑफ साउथ इंडिया.’ में तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और उप्र के 17 कलाकारों ने लगातार 70 मिनट तक की प्रस्तुतियों से शाम यादगार बनाई।
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करीब तीन हजार किमी. से आए कलाकारों ने अन्य वाद्यों के साथ जुगलबंदी की ऐसी झड़ी लगाई कि ताल यात्रा शुरू होने के बाद अंतिम सामूहिक प्रस्तुति ‘सारे जहां से अच्छा...’ पर ही रुकी।
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कार्यक्रम की शुरुआत रश्मि, शायला, सोनी, अनिरुद्ध, शुभा, शुभ्रांशी के गायन से हुई। सभी वाद्यों की एकल प्रस्तुति के बाद यहां राग हंस ध्वनि आदि ताल के बाद राग उन्नवति आठ मात्रा में उत्तर भारतीय कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
संगीत प्रस्तुतियों की जुगलबंदी ने उत्तर-दक्षिण का भेद संगीत नाद में गुम किया तो सामूहिक प्रस्तुति ने संगीत की भाषा एक की।
शाम का संचालन फिजी की शेरीन प्रसाद ने किया। अतिथियों में भइयाजी और गायिका सुनीता झिंगरन रहीं।