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लखनऊ में चलती मेट्रो में हुआ मुशायरा, बड़े शायरों ने जमाया रंग
Sun, 24 Mar 2019 01:50 AM IST
sahaj sahaj
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: sahaj sahaj
Updated Sun, 24 Mar 2019 01:50 AM IST
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मेट्रो में शायराना सफर, सजी मुशायरे की महफिल
- फोटो : अमर उजाला
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नए दौर की मेट्रो के सफर का क्रेज सिर्फ युवाओं में ही नहीं है। शनिवार को शहर के प्रमुख धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि, कवि और शायरों को भी मेट्रो का आकर्षण खींच लाया। सबने मेट्रो से करीब 24 किलोमीटर का सफर किया और सफर के बीच में ही मेट्रो में मुशायरे की महफिल भी सजाई। इस दौरान अमौसी स्टेशन पर शायर मंजर भोपाली की किताब तावीज का विमोचन भी किया गया। मंजर भोपाली ने इस दौरान पढ़ा- एक नया मोड़ देते हुए फिर फसाना बदल दीजिए, या तो खुद बदल जाइए या जमाना बदल दीजिए। उनके इस अंदाज ने खूब वाहवाही लूटी। मंजर भोपाली ने मेट्रो को लखनऊ के माथे का कोहिनूर बताया। उन्होंने कहा कि इसकी हिफाजत लखनवासियों की जिम्मेदारी है।
मेट्रो के इस यादगार शायराना सफर में ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फ रंगी महली के साथ हाजी सिराज मेंहदी, इंसराम अली, शायर मंजर भोपाली, शायरा नसीम निकखत, सैयद वकार रिजवी, नदीम अशरफ जायसी, हसन काजमी, डॉ. हारुन रशीद, अमिता वर्मा, तारिक सिद्दीकी, अरमान मलिक, सर्वेश अस्थाना, प्रदीप कपूर और अमीर हैैदर जैसे लोग मौजूद रहे। यह शायराना सफर विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन से शुरू हुआ और अमौसी एयरपोर्ट तक चला और फिर वहां से वापस वििव स्टेशन पर आकर पूरा हुआ। सभी ने शहरवासियों से अपील भी की कि वे शहर में अगर बहुत जरूरी न हो तो अपनी गाड़ी के बजाए मेट्रो से सफर करें ताकि जाम की समस्या कम हो। कह दो दिल भी जला दें जो रोशनी कम हो...
हमारे पास भी आईना है दिखाएं क्या..
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड बॉयज एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष तारिक सिद्दीकी और निकहत खान, हास्य कवि सर्वेश अस्थाना समेत अन्य रचनाकारों ने रंग जमाया। नसीम निकहत ने हमारे चेहरे के दागों पर तंज कसते हो, हमारे पास भी आईना है दिखाएं क्या.. सुनाया। हसन काजमी ने खूबसूरत हैं तेरी आंखें रातों को जागना छोड़ दे, खुद नींद आ जाएगी मुझे सोचना छोड़ दे... सुनाकर वाहवाही पाई। डॉ. हारुन रशीद ने चिराग हमने जलाए के तैरगी कम हो, कह दो दिल भी जला दें जो रोशनी कम हो... से खूब तालियां पाईं। शायरों के साथ लोगों ने खूब सेल्फी लीं।
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मेट्रो के इस यादगार शायराना सफर में ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फ रंगी महली के साथ हाजी सिराज मेंहदी, इंसराम अली, शायर मंजर भोपाली, शायरा नसीम निकखत, सैयद वकार रिजवी, नदीम अशरफ जायसी, हसन काजमी, डॉ. हारुन रशीद, अमिता वर्मा, तारिक सिद्दीकी, अरमान मलिक, सर्वेश अस्थाना, प्रदीप कपूर और अमीर हैैदर जैसे लोग मौजूद रहे। यह शायराना सफर विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन से शुरू हुआ और अमौसी एयरपोर्ट तक चला और फिर वहां से वापस वििव स्टेशन पर आकर पूरा हुआ। सभी ने शहरवासियों से अपील भी की कि वे शहर में अगर बहुत जरूरी न हो तो अपनी गाड़ी के बजाए मेट्रो से सफर करें ताकि जाम की समस्या कम हो। कह दो दिल भी जला दें जो रोशनी कम हो...
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हमारे पास भी आईना है दिखाएं क्या..
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड बॉयज एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष तारिक सिद्दीकी और निकहत खान, हास्य कवि सर्वेश अस्थाना समेत अन्य रचनाकारों ने रंग जमाया। नसीम निकहत ने हमारे चेहरे के दागों पर तंज कसते हो, हमारे पास भी आईना है दिखाएं क्या.. सुनाया। हसन काजमी ने खूबसूरत हैं तेरी आंखें रातों को जागना छोड़ दे, खुद नींद आ जाएगी मुझे सोचना छोड़ दे... सुनाकर वाहवाही पाई। डॉ. हारुन रशीद ने चिराग हमने जलाए के तैरगी कम हो, कह दो दिल भी जला दें जो रोशनी कम हो... से खूब तालियां पाईं। शायरों के साथ लोगों ने खूब सेल्फी लीं।
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