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‘आग है पानी है हवा है मुझमें'

Sat, 09 Nov 2013 09:35 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Sat, 09 Nov 2013 09:35 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर कृष्ण बिहारी ‘नूर’ की 88वीं जयंती पर

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शुक्रवार को राजेंद्र नगर स्थित नरेंद्रालय भवन में ‘बज्म-ए-नूर’ मुशायरा हुआ।

यहां शायरों ने नज्मों से कृष्ण बिहारी नूर के जीवन के अनछुए पहलुओं को रोशन किया। कवि सुधांशु व्यास ने ‘वीणा वर वादनी’ सरस्वती वंदना से शुरुआत की।

इसके बाद कृष्ण बिहारी नूर की छोटी बेटी नीरज ने ‘आग है पानी है हवा है मुझमें, और फिर मानना पड़ता है खुदा है मुझमें’ पंक्तियां सुनाकर अपने पिता की यादों को तरोताजा किया।

फिर सरवर लखनवी ने नज्म सुनाकर लोगों को भावमुग्ध कर दिया। महेश पांडे महेश ने ‘मुख चूम तो तेरा सहर्ष लिया, हर बार भले जलते ही रहे’, डॉ. मेराज साहिल ने ‘अदब में जिससे नूर था, वो नूर ही चला गया’ पंक्तियां पढ़ीं।

डॉ. मधुरिमा सिंह, वीसी राय, नारायन लखनवी सहित तमाम शायरों ने अपने कलामों का नजराना पेश किया।

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