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अखिलेश की लखनऊ को सौगात, ईको टूरिज्म सेंटर बनेगा मूसाबाग

Fri, 05 Dec 2014 11:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 05 Dec 2014 11:32 AM IST
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Musabagh will develop as eco tourism centre.

ऐतिहासिक धरोहरों के सौंदर्यीकरण के साथ ही मुख्यमंत्री ने पुराने लखनऊ को एक और बड़ी सौगात देने की तैयारी की है। सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी’ योजना के तहत इस इलाके में स्थित मूसाबाग को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा।

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इसके तहत इस वनक्षेत्र के सौंदर्यीकरण के साथ यहां मनोरंजन केंद्र विकसित किए जाएंगे। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के बाद इस दिशा में नए साल या नए वित्तीय वर्ष से काम शुरू होने की उम्मीद है। बृहस्पतिवार को मूसाबाग फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में विजिट पर पहुंचीं मुख्य वन संरक्षक ईवा शर्मा ने यह जानकारी दी।
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ईवा शर्मा ने बताया कि 5000 एकड़ क्षेत्र में फैले कुकरैल वनक्षेत्र के बाद राजधानी में यह दूसरा बड़ा नेचर हब होगा। शहर के बीचोबीच करीब 285 एकड़ में फैले पांच वनखंडों के मूसाबाग (लखनऊ इंप्रूवमेंट ट्रस्ट वन ब्लाक) को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने के साथ सैलानियों को आकर्षित करने के लिए वहां पिकनिक स्पॉट हब और मल्टी टास्क झूले, व्यूशेड आदि तमाम सुविधाओं के इंतजाम किए जाएंगे, जिससे इस इलाके को न सिर्फ पुराने लखनऊ वासियों बल्कि बाहर से आने वाले सैलानियों से भी जोड़ा सके।
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उन्होंने बताया कि बजट जारी होते ही पहले चरण में पूरे मूसाबाग फॉरेस्ट एरिया की करीब 8.5 किमी. लंबी चहारदीवारी से घेरा जाएगा, ताकि वनक्षेत्र पर अतिक्रमण न हो सके। पत्रकार वार्ता के दौरान डीएफओ अवध एससी यादव, रेंजर एके द्विवेदी भी मौजूद थे।

ये होंगी मूसाबाग की खासियतें

Musabagh will develop as eco tourism centre.

मूसाबाग में नेचर ट्रेल, व्यू शेड, बेंचेज, मल्टी टास्क झूले, पौधशाला, बेसिक रोड वे, एंट्री गेट का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। फिलहाल यहां करीब 200 लोग रोजाना मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं। माना इसके ईको टूरिज्म के रूप में विकसित होने के बाद वनक्षेत्र को बाहर से आने वाले पर्यटकों से जोड़ा जा सकेगा।

सौंदर्यीकरण के बाद मूसाबाग को पिकनिक स्पॉट हब के रूप में ढाला जाएगा। इसके अलावा यहां मौजूद वन चेतना केंद्र, बुद्धा लॉन, पौधालय, वाटर चैनल, कैंटीन आदि की व्यवस्थाएं भी सुधारी जाएंगी।  सूत्रों की मानें तो अचानक ही शुरू हुई इस कवायद के पीछे पुराने लखनऊ के सौंदर्यीकरण प्लान पर बीते दिनों सीएम के साथ एक आला अधिकारी और एक इलाकाई जन प्रतिनिधि के साथ हुई बैठक ने असर दिखाया है।

चिड़ियाघर जैसे मल्टी टास्क झूले
यहां अभी वन विश्राम गृह सुईट 200-300 रुपये में मुहैया होते हैं। वहीं, चिल्ड्रेंस पार्क में पुराने परंपरागत झूले लगे हैं। वनक्षेत्र के डवलप होने के बाद यहां लखनऊ जू के चिल्ड्रेंन पार्क जैसे विशालकाय मल्टी टॉस्क झूले लगाने की तैयारी है। इन झूलों में एक बार में 500 से 700 बच्चे एक साथ झूल सकते हैं।

शहरवासी भी दे सकते हैं अपने सुझाव

Musabagh will develop as eco tourism centre.

ऐतिहासिक  मूसाबाग को संवारने के लिए शहरवासी भी सुझाव साझा कर सकते हैं। डीएफओ ने बताया कि मूसाबाग के जंगलों (पांच वनखंडों- बालकगंज, छंदोइया, बरावन खुर्द, बरीकलां, वरौरा हुसैन बाड़ी के जंगलों समेत) में 70 से अधिक की प्रजातियों की वनस्पतियों मौजूद हैं। यहां खरगोश व रेंगने वाले वन्यजीवों के अलावा दुर्लभ प्रजातियां के पक्षी की आवाजाही लगी रहती है।

गूगल मैप पर आएगा बाग
शहर से महज 10-12 किमी. की रेंज में आने वाला मूसाबाग पुराने लखनऊ प्रमुख पिकनिक स्पॉट है। अब इसे पर्यटन केंद्र के रूप में गूगल मैप पर भी हिट करने की तैयारी है। लखनऊ-हरदोई मुख्य मार्ग पर दुबग्गा के नजदीक (अक्षांश एन-2652, 25.2, देशांतर ई 080 52, 13.6) पर स्थित इस वनक्षेत्र को लखनऊ के नवाब आसिफुद्दौला ने अंग्रेज शिल्पकार मोसियो मॉर्टिन से डवलप करवाया था। बाद में यही मूसाबाग बना।

नई शूटिंग लोकेशन
280 एकड़ से ज्यादा इलाके में फैले मूसाबाग को लेकर नई शूटिंग लोकेशन के तौर भी देखा जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो राजधानी में अधिकतर फिल्मों की शूटिंग पुराने लखनऊ में होती है। फिल्म निर्माताओं को जंगली इलाकों की शूटिंग के लिए कुकरैल के बाद दुधवा या बाहर के जनपदों का रुख करना पड़ता है। अगर ऐसे में मूसाबाग के डवलप होने पर चंद किलोमीटर के फासले पर ही उनकी यह जरूरत भी पूरी हो सकेगी।

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