मुलायम को क्यों रद्द करना पड़ा राष्ट्रीय अधिवेशन, ये रही असली वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माना जा रहा है कि विधायकों व सांसदो का अपेक्षित जनसमर्थन न मिलने से इसे टाला गया है। हालांकि सपा नेताओं का कहना है कि वे मुलायम सिंह हाल के घटनाक्रम से आहत है। पार्टी नहीं चाहती है कि उन्हें अध्यक्ष साबित करने के लिए कोई आयोजन किया जाए।
इससे सपा मुखिया और ज्यादा आहत होंगे। रामगोपाल यादव द्वारा बुलाए गए सपा के विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन में अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद मुलायम सिंह ने 5 जनवरी को जवाबी अधिवेशन बुलाया था।
इसमें यह साबित किया जाना था कि पार्टी मुलायम सिंह के साथ है। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने रामगोपाल के सम्मेलन को असंवैधानिक बताया था। इसकी एक वजह यह बताई थी इसे बहुत कम समय के नोटिस पर बुलाया गया है।
अब अल्पकालिक नोटिस पर उनके सम्मेलन पर भी अंगुली उठ सकती थी। इतने कम वक्त में राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिनिधियों को सूचित करना संभव नहीं था। दूसरे विधायकों व सांसदों का कम समर्थन मिलने से भी मुलायम खेमा चिंतित है।
सम्मेलन में बाधा डाले जाने की आशंका
पार्टी नेताओं को यह भी आशंका थी कि सम्मेलन के आयोजन में बाधा डाली जा सकती है। एलडीए से अनुमति न मिलने के साथ ही अखिलेश समर्थकों के हंगामे का अंदेशा था।
जिस तरह सपा दफ्तर पर कब्जा किया, उससे भी यह आशंका बढ़ी थी। सपा ऑफिस पर कब्जे के बाद शिवपाल समर्थक वहां जाकर फिर कब्जा करना चाहते थे लेकिन मुलायम ने टकराव से बचने के लिए उन्हें रोक लिया था।
मुलायम खेमे के सपा नेताओं का कहना है कि नेताजी को कानूनी तौर पर राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाने की जरूरत ही नहीं है। पार्टी संविधान के मुताबिक वे ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाने के लिए भी वही अधिकृत है।