'भारत की अर्थव्यवस्था पर 440 अरब डॉलर का कर्ज'
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समाजवादी आंदोलन के महानायक डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्य तिथि पर रविवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। राजधानी में लोहिया पार्क, लोहिया ट्रस्ट व लोहिया अस्पताल में उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों और सिद्धातों पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने संबोधन प्रस्तुत किया।
लोहिया ट्रस्ट और लोहिया पार्क में डॉ. लोहिया की प्रतिमाओं पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने बैटरी चालित कार से लोहिया पार्क का भ्रमण भी किया। मुलायम ने सभी को लोहिया जी का साहित्य पढ़ने की सीख दी।
मुलायम ने कहा, उनके बताए रास्ते पर चलकर ही समाजवाद की लड़ाई लड़ी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवाद ही एकमात्र रास्ता है, जिसमें शोषित पीड़ित और उपेक्षित वर्गों को विशेष अवसर देकर समानता के स्तर पर पहुंचाया जा सकता है।
लोहिया ट्रस्ट में वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने भी माल्यार्पण किया। इस मौके पर मंत्री राजेन्द्र चौधरी, प्रदेश सचिव एसआरएस यादव तथा डॉ. लोहिया के पुराने साथी राजस्थान के पंडित रामकिशन शर्मा भी मौजूद थे।
भारत की अर्थव्यवस्था पर 440 अरब डॉलर का कर्ज
लोहिया अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, पूर्व मंत्री भगवती सिंह और पूर्व विधायक राजेन्द्र यादव ने लोहिया प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
इस मौके पर महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. विजय लक्ष्मी, सीएमएस डॉ. ओंकार यादव, सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव सहित अस्पताल के डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद था। चौक में लोहिया जी की मूर्ति पर वरिष्ठ नेता भगवती सिंह ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
लोहिया के भाषणों की डीवीडी जारी
लोहिया ट्रस्ट में काबीना मंत्री शिवपाल यादव ने चिंतन सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र द्वारा संपादित व संकलित लोहिया जी के ऐतिहासिक भाषणों एवं तस्वीरों की पेन ड्राइव और डीवीडी जारी की। शिवपाल ने कहा कि डॉ. लोहिया के विचार, सिद्धांत और दर्शन आज उनके जीवनकाल से भी ज्यादा प्रासंगिक हैं।
उनके सिद्धांतों पर देश चला होता तो भारतीय अर्थव्यवस्था 440 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज में न होती। देश की 68 हजार वर्ग किमी भूमि पर चीन का कब्जा न होता। लोहिया ने हमेशा सामाजिक-आर्थिक विसंगतियों पर प्रहार किया। नई पीढ़ी में गांधी और लोहिया को पढ़े बिना राजनीति की समझ विकसित नहीं हो सकती।