आजम के लिए मैनपुरी सीट छोड़ेंगे मुलायम!
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मुलायम की मनोदशा के चक्कर में मैनपुरी सीट फंस गई है। पार्टी में चल रही कानाफूसी पर यकीन किया जाए, तो मुलायम संसद में अपने साथी को लेकर खासा परेशान हैं। यही वजह है कि वो मैनपुरी सीट पर परिवार की बलि चढ़ाने का मन बना चुके हैं।
दरअसल, लोकसभा चुनाव में बुरी हार के बाद मुलायम सिंह यादव के बोल 'अब मैं बैठूंगा किसके साथ?' से ही ये बातें उठ रही हैं।
मुलायम के साथ संसद में पहुंचे समाजवादी पार्टी के चार सांसद उनके परिवार के ही हैं। मुलायम समझ नहीं पा रहे कि अब संसद में उनके साथ कौन बैठेगा।
अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, मुलायम अपने साथ किसी हमउम्र या हमराही को ही संसद में अपने साथ बैठाना चाहते हैं और इसके लिए वो मैनपुरी से अपने रिश्तेदार को टिकट देने से कतरा रहे हैं।
इसलिए परिवार को नजरअंदाज करेंगे मुलायम!
दरअसल, मुलायम की बहु व कन्नौज से सांसद डिंपल यादव अपने पिछले कार्यकाल में संसद के भीतर कम ही नजर आती थीं।
इसी तरह, मुलायम के भतीजे धर्मेंद यादव भी संसद में सवाल पूछने के मामले में काफी पीछे रहे। इसके अलावा, धर्मेंद का कद भी मुलायम जितना नहीं कि वो संसद में मुलायम का साख की बराबरी कर पाएं।
मुलायम के भाई रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव संसद में सबसे नए सांसद हैं। इसलिए, उनसे किसी साथ की उम्मीद ही बेमानी है।
यही वजह है कि मुलायम के पास कोई और विकल्प नहीं है। यानी, अगर मुलायम मैनपुरी सीट छोड़ते हैं तो वे किसी बड़े कद वाले नेता को ही टिकट देने को मजबूर हैं।
ये हो सकते हैं मुलायम के साथी
मुलायम की सबसे बड़ी चिंता यह भी है कि संसद में भले ही सपा के पांच सांसद हों, लेकिन वहां समाजवादी पार्टी की आवाज गूंजनी बेहद जरूरी है।
यही वजह है कि मुलायम किसी ऐसे नेता को संसद में अपने साथ बैठाना चाहते है, जो न सिर्फ कद में परिवार के सांसदों से बड़ा हो बल्कि उसकी बातों में भी गंभीरता और वजन हो।
समाजवादी पार्टी के अंदुरूनी सूत्रों की मानें तो इस नजरिए से मुलायम के पास सिर्फ दो ही नेता हैं, जो कद्दावर सांसद की कमी पूरी कर सकते हैं।
इनमें मुलायम के पुराने सहयोगी और मौजूदा यूपी सरकार में मंत्री आजम खां और विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
इसलिए तेज प्रताप को करना होगा इंतजार!
पार्टी में यह भी बात बल पकड़ रही है कि मुलायम तेजप्रताप को इंतजार करवाएं और आजम या माता प्रसाद पांडेय को मैनपुरी से मैदान में उतार दें।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, 'अब क्योंकि संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व बुरी तरह कमजोर हुआ है, इसिलए सपा को वहां मजबूत सांसदों की सख्त जरूरत है।'
हालांकि वह यह भी कहते हैं कि मुलायम खुद सपा की आवाज बुलंद करने में सक्षम हैं, लेकिन आजम या माता प्रसाद पांडेय का साथ सपा की स्थिति को और भी मजबूत कर सकता है।
उनका मानना है कि आजम खां और माता प्रसाद पांडेय दोनों ही लोगों का रिकॉर्ड विधानसभा में बेहद अच्छा रहा है। आजम आठ बार विधानसभा पहुंचे हैं और दो बार संसदीय कार्य मंत्री भी रहे हैं।
ये दो सब पर पड़ सकते हैं भारी
सपा के लोगों का यह भी मानना है कि आजम की बोलने की क्षमताओं पर कोई शक नहीं किया जा सकता है। साथ ही अगर वो मैनपुरी से चुनाव लड़ते हैं, तो मुस्लिम समुदाय में भी एक अच्छा संदेश जाएगा।
यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि आजम खुद को मुस्लिमों के अकेले रहनुमा के तौर पर यूपी में पेश करते रहे हैं और यूपी से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया है।
दूसरी तरफ, पांडेय भी पार्टी के पुराने और भरोसेमंद स्तंभ रहे हैं। पांडेय दो बार विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और सपा से दूर रहने वाले सवर्ण वोट बैंक को खींचने में उनकी अहम भूमिका हो सकती है।