इस तरह साइकिल को रफ्तार देंगे मुलायम
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चुनाव में हिलाकर रख देने वाली हार से बौखलाए मुलायम ने आज पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई। बताया जा रहा है कि इसमें सपा मुखिया कड़े फैसले कर सकते हैं।
लोकसभा चुनाव के अप्रत्याशित नतीजों से सकते में आई समाजवादी पार्टी में हार पर मंथन शुरू हो गया है।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत कई नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। इसके बाद भी नेताओं से मुलाकात का दौर चलता रहा।
सोमवार को सभी प्रत्याशियों के साथ बैठक कर हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। चुनाव में करारी हार के बाद सपा कुछ बड़े फैसले ले सकती है। संगठन में भी बड़े फेरबदल के संकेत हैं।
बुलाई प्रत्याशियों की बैठक
लोकसभा चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही मुलायम सिंह यादव दिल्ली चले गए थे। शनिवार शाम वे लखनऊ लौटे। उसके बाद से मुलाकातों का दौर जारी है।
रविवार को उन्होंने अपने आवास पर सीएम अखिलेश यादव, मंत्री राजेंद्र चौधरी, गायत्री प्रजापति, राजपाल कश्यप समेत पिछड़े वर्ग के कुछ नेताओं से बातचीत की। सपा मुखिया लोकसभा चुनाव में पार्टी से प्रदर्शन से नाराज हैं।
उन्होंने जानना चाहा कि किस स्तर पर चूक हुई है। सपा पिछड़ों, अति पिछड़ों की हिमायती रही है लेकिन वे उम्मीद के मुताबिक पार्टी से क्यों नहीं जुड़ पाए? हालांकि सभी नेताओं ने अपनी बात रखी लेकिन मुलायम उनके तर्कों से पूरी तरह सहमत नजर नहीं आए।
हार के कारणों की जमीनी हकीकत जानने के लिए सपा सुप्रीमो ने सोमवार को लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों की बैठक बुलाई है। सपा मुख्यालय पर सुबह 10 बजे शुरू होने वाली बैठक में प्रत्याशियों को पूरे फीडबैक के साथ आने को कहा गया है।
कुछ नेताओं पर गिरेगी गाज
ऐसा माना जा रहा है कि उम्मीदवारों से मिले फीडबैक के आधार पर संगठनात्मक स्तर पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
यह भी संभव है कि प्रदेश और राज्य इकाइयों को भंग कर दिया जाए। चूंकि पार्टी की परफॉर्मेंस पूरे प्रदेश में खराब रही है, इसलिए संगठन की ओवरहॉलिंग के लिए कड़ा निर्णय लिया जा सकता है।
चुनाव के दौरान भितरघात या असहयोग करने वाले कुछ नेताओं पर गाज भी गिर सकती है। जिन दर्जाधारी मंत्रियों की शिकायतें मिली हैं, उनके पद भी छीने जा सकते हैं।
चुनाव के दौरान कुछ विधायकों और मंत्रियों की भूमिका भी ठीक नहीं पाई गई है। उनके बारे में भी सपा नेतृत्व कोई फैसला कर सकता है।
क्या अध्यक्ष पद छोड़ेंगे अखिलेश
पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए सीएम अखिलेश यादव क्या सपा का प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ेंगे? इसको लेकर रविवार को दिन भर अटकलें लगाई जाती रहीं। अखिलेश के पास मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष का भी दायित्व है।
पार्टी का एक खेमा इस बात का पक्षधर है कि सीएम और अध्यक्ष पद अलग-अलग नेताओं के पास होने चाहिए। सपा के एक खेमे में शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने संबंधी अटकलें भी रहीं।
अखिलेश के प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने की चर्चाओं को तब और बल मिला जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नैतिकता के नाते सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।
हालांकि अखिलेश यादव ने अध्यक्ष पद छोड़ने की अटकलों को खारिज किया है। सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी कहा कि इस तरह की चर्चाएं पूरी तरह झूठी हैं।