यूपी में गेहूं खरीद के लिए सरकार ने जारी किए कड़े निर्देश, MP-MLA करेंगे मॉनीटरिंग
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यूपी में शनिवार से गेहूं खरीद शुरू हो जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर शुक्रवार को कई कड़े निर्देश दिए जिससे कि किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो सके। उन्होंने सांसदों व विधायकों से आग्रह किया है कि अपने-अपने क्षेत्र में गेहूं खरीद केंद्रों की मॉनीटरिंग करें।
इससे कहीं कोई कमी या गड़बड़ी होने पर राज्य सरकार को जल्द से जल्द फीडबैक प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हिदायत भी दी है कि गेहूं खरीद आधार कार्ड व किसान बही के आधार पर ही की जाए। जबकि भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में ही होंगे।
सरकार की तरफ से प्रदेश में किसानों से 80 लाख टन गेहूं खरीदने की घोषणा की गई है। इसमें 70 लाख टन राज्य सरकार की एजेंसियां खरीदेंगी। बाकी भारतीय खाद्य निगम खरीदेगा। प्रदेश में पहली बार गेहूं खरीद का इतना अधिक लक्ष्य रखा गया है।
समझा जाता है कि यह लक्ष्य भाजपा नेताओं की चुनाव के दौरान उन बातों के मद्देनजर रखा गया है जिसमें वे कह रहे थे कि प्रदेश में गेहूं और धान की उपज का चौथाई हिस्सा भी सरकार द्वारा खरीदने की कोशिश नहीं की जाती। गेहूं का समर्थन मूल्य केंद्र सरकार पहले ही 1625 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर चुकी है। इस खरीद के लिए प्रदेश में लगभग पांच हजार केंद्र खोले जाएंगे।
हीलाहवाली और बिचौलिए मिले तो कठोर कार्रवाई
राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने शुक्रवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों से खिलवाड़ न होने देने के लिए आगाह किया है। साथ ही कहा है कि जिस केंद्र पर खरीद में लापरवाही या किसानों के हितों से खिलवाड़ की सूचना मिलेगी वहां के प्रभारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि पिछली राज्य सरकार में गेहूं की खरीद बिचौलियों के माध्यम से की गई थी। पर, मौजूदा सरकार किसी भी हालत में बिचौलियों और आढतियों से गेहूं खरीद की इजाजत नहीं दे सकती।
क्रय केंद्रों पर किसानों से सीधे गेहूं खरीद की व्यवस्था की गई है। अधिकारी यह भी ध्यान रखें कि केंद्रों पर किसानों को परेशान न किया जाए।
इन एजेंसियों के 5000 केंद्रों पर होगी खरीद
खाद्य विभाग--750
पीसीएफ--3000
कोऑपरेटिव यूनियन--400
कर्मचारी कल्याण निगम--200
यूपी एग्रो--200
उपभोक्ता सहकारी एवं राज्य राज्य खाद्य आवश्यक वस्तु निगम
व नेशनल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के 100-100 केंद्र और भारतीय खा निगम एवं निजी एजेंसी के 150 केंद्र।