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कैबिनेटः दिल्ली-मेरठ के बीच चलने वाली रैपिड ट्रेन के एमओयू को मंजूरी

Sat, 05 Sep 2020 01:07 PM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 05 Sep 2020 01:07 PM IST
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MoU approved for rapid train running between Delhi-Meerut
फाइल फोटो

दिल्ली से गाजियाबाद होते हुते मेरठ तक तेज गति से चलने वाली रीजनल रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना में केंद्र और यूपी के बीच होने वाले मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओयू) को शुक्रवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई। आवास विभाग के अधिकारी इस पर अब हस्ताक्षर कर केंद्र सरकार को भेजेंगे।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एमओयू को दी गई मंजूरी के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लोगों की सुविधाओं के लिए इसे चलाया जाएगा। इससे जहां भीड़-भाड़ व प्रदूषण कम होगा, शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के अवसरों तक लोगों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। दिल्ली, गाजियाबाद व मेरठ के बीच आरआरटीएस परियोजना की कुल लागत 30274 करोड़ रुपये है। 
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इसमें केंद्र सरकार 5872 करोड़, दिल्ली सरकार 1180 करोड़ और यूपी सरकार 6048 करोड़ रुपये देगी। केंद्र और राज्य सरकार इस परियोजना को मंजूरी दे चुकी है। इससे एनसीआर के लोगों को जहां सर्वाजनिक परिवहन की बेहतर सुविधा मिलेगी, वहीं एनसीआर में भविष्य में बढ़ते वाहनों के दबाव से मुक्ति मिलेगी।
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आरआरटीएस रेल अधारित हाई स्पीड ट्रेन है। इसकी डिजाइन गति 180 किमी प्रति घंटा और औसत गति 100 किमी प्रति घंटा है। यह मेट्रो रेल से तीन गुना अधिक तेजी से चलेगी। परियोजना से व्यापक आर्थिक लाभ मिलेगा, जैसे श्रम व उद्योग से उत्पादन में सुधार होगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही इस क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि भी मिलेगी। आरआरटीएस एनसीआर में यात्री परिवहन की सबसे तेज, सबसे आरामदायक और सुरक्षा व्यवस्था होगी।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना प्रदेश में लागू

भारत सरकार की ब्लू रिवल्यूशन : इंटीग्रेटेड डेवलेपमेंट एंड मैनेजमेंट ऑफ फिशरीज योजना के स्थान पर नई केंद्रीय योजना के रूप प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को प्रदेश में लागू किया जाएगा। कैबिनेट बाईसर्कुलेशन इसे मंजूरी दे दी गई। पीएमएमएसवाई प्रदेश में इसी साल 2020-21 से 2024-25 तक क्रियान्वित की जाएगी।

इस योजना में देश के सभी राज्यों में 20050 करोड़ राशि का निवेश किया जाना प्रस्तावित है। इसमें 9407 करोड़ रुपये केंद्रांश, 4880 करोड़ रुपये राज्यांश के रूप में और शेष 5763 करोड़ की राशि लाभार्थियों द्वारा स्वयं वहन की जाएगी। केंद्र पोषित योजनाओं में शत-प्रतिशत भारत सरकार की हिस्सेदारी है जिनमें सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को कुल इकाई लागत का 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति, जनजाति की महिलाओं लाभार्थियों को 60 प्रतिशत केंद्रीय सहायता अनुदान के रूप उपलब्ध कराई जाएगी। इसके क्रियान्वयन से प्रदेश में मछली उत्पादन वर्तमान 6.97 लाख टन से बढ़ाकर 8.58 लाख टन किया जा सकेगा। 

आठ नए मेडिकल कॉलेजों को मिलेगा स्वशासी का दर्जा

केंद्र सहायतित योजना के तहत आठ जिलों में बन रहे मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए सोसाइटी के गठन को कैबिनेट बाइसर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। एटा, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, प्रतापगढ़ और मिर्जापुर के जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत करके यह राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं।

2021 से इन मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रयास राज्य सरकार कर रही है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र सहायतित योजना के पहले चरण में बस्ती, बहराइच, अयोध्या, फिरोजाबाद और शाहजहांपुर में पांच स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेजों का संचालन सोसाइटी के माध्यम से हो रहा है। इसके बाद फेज टू के आठ जिलों में राजकीय मेडिकल कॉलेजों का संचालन भी सोसाइटी के माध्यम से करने का फैसला किया गया है। 

बिजली परियोजना के लिए दी जाएगी सिंचाई निरीक्षण भवन की भूमि

कैबिनेट ने कानपुर नगर में सिंचाई विभाग के निरीक्षण भवन की भूमि घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह भूमि कीमत लेकर भारत सरकार के उपक्रम नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड, घाटमपुर, कानपुर नगर को हस्तांतरित की जाएगी।

इसके एवज में प्रदेश सरकार को 11 करोड़ 18 लाख 46 हजार 609 रुपये की प्राप्ति होगी। बिजली उत्पादन होने से प्रदेश की जनता को इसका लाभ मिलेगा। इस भूमि में स्थित खड़े वृक्ष, डाक बंगला और निष्क्रिय  आवास, सभी नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड को सौंपे जाएंगे। 

पेयजल की 8 और परियोजनाओं को मंजूरी

कैबिनेट ने जल जीवन मिशन के तहत बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के 9 जिलों में पाइप पेयजल की 8 परियोजनाओं की लागत के प्रस्ताव को कैबिनेट बाइसर्कुलेशन हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र की पूरी आबादी को और प्रदेश के शेष हिस्सों में आर्सेनिक, फ्लोराइड, जेई और एईएस प्रभावित आबादी को पाइप पेयजल से जोड़ना है।

इन 9 जिलों की परियोजनाओं की कुल लागत 15722.89 करोड़ रुपये है। इसी के तहत व्यय वित्त समिति से अनुमोदित अन्य 8 परियोजनाओं की लागत को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। 13 परियोजनाओं को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। 

सरस्वती हाइटेक सिटी प्रयागराज को 28.22 करोड़ स्टांप ड्यूटी से छूट

प्रदेश सरकार ने उद्योगों को सस्ते दर पर भूखंड उपलब्ध कराने के लिए सरस्वती हाईटेक सिटी परियोजना प्रयागराज में स्थित भूखंडों की रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टांप शुल्क से छूट देने का फैसला किया है। औद्योगिक विकास विभाग के इससे संबंधित प्रस्ताव को शुक्रवार देर रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई। 

गन्ना विकास परिषद के सभापति के विरुद्ध आ सकेगा अविश्वास
गन्ना विकास परिषदों के सभापति के विरुद्ध अब अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। इसके लिए नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट बाईसर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई। प्रदेश की गन्ना विकास परिषदों में निर्वाचित सभापति व संचालक सदस्य, सहकारी गन्ना विकास समितियों के मूल सदस्य होते हैं। यानी परिषदों के संचालक मंडल में गन्ना समितियों के मूल सदस्य ही निर्वाचित होकर आते हैं।

गन्ना समितियों के सभापतियों के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के संबंध में पहले से प्रावधान उपलब्ध हैं, लेकिन गन्ना विकास परिषद के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की व्यवस्था नहीं थी। परिषद के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश 2020 लाया गया था।

विधायी विभाग ने इसका नोटिफिकेशन 22 मई को जारी की थी। इस अध्यादेश के जरिये गन्ना विकास परिषदों के सभापति के विरुद्ध अविश्वास लाए जाने के लिए विधिक प्रावधान किए हैं। अधिनियम में किए गए प्रावधान के क्रम में नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। 
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