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खोई मां सात साल बाद मिली तो बच्चा बन गया बुजुर्ग बेटा

Wed, 24 May 2017 03:02 PM IST
amarujala.com, written by इंद्रभूषण दुबे
amarujala.com, written by इंद्रभूषण दुबे Updated Wed, 24 May 2017 03:02 PM IST
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mother met her family after seven years in lucknow
मां को घर ले जाते कुमार - फोटो : amar ujala
मेरी ख्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं
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मां से इस तरह लिपट जाऊं की बच्चा हो जाऊं...।

कुछ-कुछ ऐसे ही भावनाएं बुजुर्ग रवींद्र कुमार भारती (65) की आंखों से आंसू बनकर उस वक्त छलक पड़ीं, जब उनकी खोई हुई मां सात साल बाद उनकी आंखों के सामने आई। 

एक बच्चे की तरह फफक-फफकर मां के गले लग वह रो पड़े। अपनों के मिलने की उम्मीद खो चुकी बूढ़ी मां सुशीला देवी (85) लोहिया अस्पताल में भर्ती थीं। बेटे को सामने देख वह उसे अपलक निहारती रहीं और रोती रहीं। 
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मां-बेटे का यह मिलन देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। यह दीगर है कि ये आंसू खुशी के थे। यह सब संभव हुआ लोहिया अस्पताल में तैनात डॉ. प्रवीण, पीआरवी 0509 पर तैनात एसआई पीएन दीक्षित, कांस्टेबल प्रदीप सरोज और चालक मो. फाजिल के प्रयासों से। रविवार को ही रवींद्र कुमार मां को घर ले आए थे। 
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राजाजीपुरम में मीना बेकरी के पास रहने वाले रवीन्द्र कुमार सीडीओ दफ्तर से रिटायर हैं। पत्नी, एक बेटा और बेटी का छोटा सा परिवार है। उन्होंने बताया कि सुशीला देवी एक राजकीय विद्यालय से प्रधानाचार्या पद से 1993 में रिटायर हुईं थीं, वह सौतेली मां हैं। 

पुलिस और डॉक्टर ने निभाया सामाजिक दायित्व

mother met her family after seven years in lucknow
इन्हीं पुल‌िस कर्म‌ियों ने सुशीला देवी को पर‌िवार से म‌िलाया - फोटो : amar ujala
रिटायरमेंट के बाद वह बेटी के घर गोमतीनगर में रहती थीं। बहनोई चंद्र प्रकाश एचएएल में इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हैं। बकौल रवीन्द्र मां काफी जिद्दी हैं। एक दिन अचानक बोलीं बेटी के घर जा रही हैं। कभी-कभी ही उनसे बात होती थी। 

इस बीच लापता हो गईं, तब इसकी सूचना उन्हें मिली थी। इसके बाद उन्होंने ढूंढने का प्रयास किया पर नहीं मिलीं तो इसे तकदीर मानकर चुप बैठे रह गए। सात साल बाद बीते रविवार को उन्हें मां के लोहिया अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिली थी। 

सात साल पहले लापता हुईं बुजुर्ग रविन्द्र की मां सुशीला देवी को उनके परिवार से मिलाने का पूरा श्रेय पुलिस और डॉक्टरों को जाता है। ड्यूटी के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक दायित्व निभाकर एक मिसाल पेश की है। 

रविन्द्र और उनका परिवार लोहिया में तैनात डॉ. प्रवीण शर्मा, पीआरवी के पुलिसकर्मी एसआई प्रेम नारायण दीक्षित, कांस्टेबिल प्रदीप सरोज और चालक मो. फाजिल की तारीफ करते नहीं थकता है। 
 

फिर भी क्यों भटकना पड़ा मां को

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गोद में मां को ‌ल‌िटाए रविन्द्र कुमार - फोटो : amar ujala
रविन्द्र ने कहा कि अपने जीवन में डॉक्टर और पुलिस का यह रुप पहली बार देखा है। इसके लिए हमारा पूरा परिवार आजीवन आभारी रहेगा। वहीं बहु ने कहा कि सास को फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर दूंगी। हमारे घर में रविवार को दीपावली और होली से भी बड़ा त्यौहार मनाया गया। 

रवींद्र ने बताया कि करीब छह बजे वह घर पहुंचे। वहां बेटी और बेटा इंतजार कर रहे थे। दोनों अपनी दादी के लिए कमरा भी तैयार कर लिया था। इसके बाद काफी देर तक पूरा परिवार सुशीला के कमरे में ही रहा।

राम मनोहर लोहिया में तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि पिछले सप्ताह बुधवार को उनकी ड्यूटी थी। दोपहर में एक वृद्घ महिला को बेहोशी की हालत में किसी ने अस्पताल में भर्ती कराया। महिला के पास एक नंबर मिला, कॉल करने पर महिला ने उठाया।

सुशीला के बारे में जानकारी दी तो उसने साफ शब्दों में आने और मिलने तक से मना कर दिया। इसके बाद रविवार को जब सुशीला की हालत में सुधार हुआ तो दोपहर करीब 12 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना पर पीआरवी 0509 पर तैनात पुलिसकर्मी पहुंचे। इसके बाद क्या हुआ मुझे पता ही नहीं। 

बेटी-दामाद, बेटा-बहू और पोते-पोती सबके होते हुए एक बूढ़ी मां सात साल तक दर-दर की ठोकरें खाती रही, आखिर क्यों यह सवाल अहम है। इतने दिनों तक सुशीला कहां और किस हाल में रही, यह कौन जानता है। पर इतना तो यह है कि इतने सालों में उन्होंने बहुत दर्द झेला होगा। 
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