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यूपी: त्रिस्तरीय पंचायतों में चुने जाएंगे 8,69,814 जनप्रतिनिधि, निर्वाचन आयोग को भेजा गया परिसीमन

Thu, 21 Jan 2021 10:23 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 21 Jan 2021 10:23 AM IST
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More than eight lakh members will be elected in Panchayat election.
पंचायत चुनाव। - फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश में इस बार 75 जिला पंचायत, 826 क्षेत्र पंचायत (ब्लॉक), 58,194 ग्राम पंचायत, 3051 जिला पंचायत सदस्य, 75,855 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 7,31,813 ग्राम पंचायत सदस्य चुने जाएंगे। इस तरह कुल 8,69,814 जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। इस बाबत बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायतों के परिसीमन का कार्य पूरा करके निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया है। अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में नगरीय निकायों के सीमा विस्तार या नए निकायों के गठन से ग्राम पंचायतों की संख्या में कमी आई है।

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गौरतलब है कि प्रदेश में ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायतों के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का काम काफी दिनों से चल रहा था। पूर्ण परिसीमन चार जिलों गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, संभल व गोंडा में हुआ है। इनमें वर्ष 2015 में परिसीमन नहीं हो पाया था। जबकि जिन जिलों में नए नगरीय निकायों का गठन हुआ है या नगरीय निकायों का सीमा विस्तार हुआ है, उनमें आंशिक परिसीमन कराया गया है। ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायतों के निर्वाचन क्षेत्र (वार्डों) के परिसीमन (पुनर्गठन) का काम पूरा करके अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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आरक्षण नीति में लग सकता है समय

पंचायतीराज निदेशालय ने आरक्षण के फॉर्मूले का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार ने बताया कि आरक्षण नीति तैयार कर ली गई है, लेकिन अभी इस पर शासन स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। आरक्षण नीति का शासनादेश जारी होने में थोड़ा समय लग सकता है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि आरक्षण नीति फरवरी के मध्य तक जारी किया जाएगा। ब्लॉक व जिला स्तर पर आरक्षण के प्रस्ताव तैयार करने, उन पर आपत्ति मांगने व उनका निराकरण करने में लगभग एक माह का समय लगेगा।

शासन स्तर से जब आरक्षण का प्रस्ताव निर्वाचन आयोग को चला जाएगा, तभी चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। आरक्षण नीति जल्दी घोषित करने पर तमाम लोगों के अदालत जाने की संभावना को देखते हुए शासनादेश में विलंब हो सकता है।

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