वीमेन पावर लाइन पर प्रतिमाह दर्ज की जा रहीं 23 हजार से अधिक शिकायतें
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प्रदेश भर से महिला उत्पीड़न की मिल रही शिकायतों पर महिला पावर लाइन की एडीजी अंजू गुप्ता ने बताया कि 1090 सेवा के सॉफ्टवेयर को बेहतर किया गया है और इस सेवा का प्रचार प्रसार बढ़ाया गया है।
जिससे 2017 में जहां प्रति माह औसतन साढ़े 18 हजार से 19 हजार लड़कियों की मदद की जाती थी, वहीं अब लगभग 23 हजार से अधिक शिकायतें प्रतिमाह दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 2017 में कुल 2,21,943 शिकायतें 1090 पर दर्ज की गई थीं।
2018 में यह संख्या 2,66,005 हो गई और 2019 के जनवरी से अक्तूबर तक 2,37,018 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें से 98.80 प्रतिश शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 1090 पर भरोसा बढ़ा है। 2017 में जहां केवल 14 प्रतिशत शिकायतें ग्रामीण क्षेत्रों से आती थीं, वहीं 2019 में यह प्रतिशत बढ़कर 46 हो चुका है।
तीन माह में दिखने लगेंगे सेफ सिटी के काम
एडीजी ने निर्भया फंड के तहत चल रही परियोजनाओं के बारे में बताया कि 89.3 करोड़ रुपये से जो प्रोजेक्ट संचालित किए जा रहे हैं वह अगले तीन महीने में जमीन पर दिखने लगेंगे।
इसमें सबसे अधिक खर्च इंटीग्रेटेड स्मार्ट कंट्रोल रूम के लिए आ रहा है, जिसमें 67.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शहर में संवेदनशील स्थानों पर लगने वाले 1500 कैमरे इस कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे। इसके लिए लखनऊ पुलिस लाइन में बिल्डिंग बनाई जाएगी।
इसके अलावा महिला पावर लाइन की क्षमता दोगुनी करने के लिए 80 टर्मिनल (कंप्यूटर) के लिए नया सेटअप तैयार करना है। इसके अलावा 100 से अधिक पिंक बूथ बनाए जाने हैं। पेट्रोलिंग के लिए 110 पिंक स्कूटर और 10 एसयूपी खरीदी जानी है।
जुलाई में मिला बजट
एडीजी ने बताया कि निर्भया फंड के तहत बजट इसी वर्ष जुलाई में स्वीकृत किया गया है। इसमें अधिकतर काम सिविल के हैं, जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाती है और पार्ट में भुगतान किया जाता है।
ऐसे में जो फंड रिलीज हुआ है, उसे खर्च होने में थोड़ा समय लगेगा। उन्होंने बताया कि फरवरी तक जिस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, वह जमीन पर नजर आने लगेंगे।