कैसे सुलझे गुत्थी: फोरेंसिक लैब में विसरा के 200 नमूनों को जांच का इंतजार
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राजधानी की फोरेंसिक लैब में विसरा (अंत: अंगों) के 200 से अधिक नमूने जांच के इंतजार में अटके हैं। यह आंकड़ा महानगर स्थित फोरेंसिक लैब में भेजे गए नमूनों का है। थानों के मालखाना में भी विसरा के सैकड़ों नमूने पड़े सड़ रहे हैं। जांच पूरी न होने और रिपोर्ट न आने से विवेचकों की आफत है।
वह हत्या और हादसों के बीच फर्क तय नहीं कर पा रहे हैं, जिसका असर मुकदमों पर पड़ रहा है। मुकदमे लंबित हो रहे हैं और विवेचकों को फटकार मिल रही है। हालांकि, एसएसपी कलानिधि नैथानी का कहना है कि लंबित मामले ज्यादातर खुदकुशी अथवा दुर्घटनाओं में मौत के हैं। महत्वपूर्ण केसों में फोरेंसिक लैब के अधिकारियों से संपर्क कर विसरा की जांच प्राथमिकता से कराई जाती है।
संदिग्ध हालात में हुई मौत के किसी भी मामले में विसरा की जांच सबसे अहम होती है। मौत जहर से हुई है तो जहर किस तरह का है? यह विसरा की जांच में ही सामने आता है। इसके अलावा अगर मृत्यु का कोई प्रत्यक्ष कारण नहीं है तो भी विसरा जांच का महत्व बढ़ जाता है। फोरेंसिक लैब के विशेषज्ञ विसरा के नमूनों की जांच से मृत्यु के संभावित कारणों का पता लगा सकते हैं।
हालांकि, विसरा की जांच को लेकर लैब के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। लैब में संदिग्ध हालात में हुई मौत के 200 से अधिक मामलों में विसरा की जांच नहीं हो पा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह आंकड़े पिछले महीने से डेढ़ साल पहले तक के हैं। विसरा रिपोर्ट न आने से ऐसे सभी मामलों की विवेचना अधूरी पड़ी है। अधिकतर नमूनों के खराब होने की आशंका भी है।
छह माह में खराब हो जाते हैं सैंपल
फोरेसिक विशेषज्ञ व स्टेट मेडिकोलीगल सेल के संयुक्त निदेशक डॉ. गयासुद्दीन खान बताते हैं कि विसरा के नमूनों को सुरक्षित रखने की अधिकतम अवधि छह महीने ही है। इसके बाद भी अगर कोई नमूना रखा जाता है तो वह खराब हो जाता है। ऐसे नमूनों के विश्लेषण में निर्धारित परिणाम नहीं मिल पाते।
हवादार और रोशनीयुक्त कमरे में रखने चाहिए नमूने
फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक विसरा के नमूने सुरक्षित रखने के लिए स्थान हवादार और रोशनीयुक्त होना चाहिए। नमीयुक्त जगह पर नमूने खराब होने की आशंका रहती है। हालांकि, अधिकतर वहीं विसरा के नमूने रखे जा रहे हैं जहां नमी और अंधेरा रहता है।
प्रदेशभर से नमूने आने के कारण पेंडेंसी
फोरेंसिक लैब में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से विसरा के नमूने आने की वजह से काम का भार अधिक है। यही वजह है कि विसरा की जांचें लंबित हैं। लैब के सूत्रों का कहना है कि हाई प्रोफाइल मामलों में अधिकारियों के हस्तक्षेप की वजह से जांच हो जाती है, लेकिन आम दिनों में आने वाले नमूने कई-कई महीने तक पड़े रहते हैं।
तीन जार में रखे जाते हैं नमूने
फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. गयासुद्दीन खान बताते हैं कि जांच के लिए तीन जार में विसरा के नमूने रखे जाते हैं। एक जार में करीब आधा किलो वजन का पेट के भीतर का हिस्सा होता है। दूसरे में लीवर, प्लीहा (स्प्लीन), छोटी आंत का 20 इंच का टुकड़ा, दोनों तरफ की आधी-आधी किडनी होती है जबकि तीसरे जार में खून के सैंपल होते हैं।