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Lucknow News: जितने आवारा कुत्तों की हो रही नसबंदी, उससे ज्यादा पैदा हो रहे

Fri, 11 Jul 2025 01:59 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jul 2025 01:59 AM IST
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More stray dogs are being born than the number of stray dogs being sterilized
डालीगंज में सड़क पर घूमते कुत्ते।
लखनऊ। आवारा कुत्तों ने शहर में आतंक मचा रखा है। आए दिन ये किसी न किसी को शिकार बना रहे हैं। खास तौर पर बच्चे इनका निशाना बन रहे हैं। खास बात यह है कि नसबंदी अभियान के बाद भी इनकी आबादी बढ़ रही है।
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वर्ष 2019 से अब तक करीब 94 हजार कुत्तों की नसंबदी की जा चुकी है। छह वर्ष पहले जब यह कार्यक्रम शुरू हुआ था तब इनकी आबादी करीब 70 हजार थी, जो इस समय करीब 1.10 लाख पहुंच चुकी है। इससे साफ है कि जितने कुत्तों की नसबंदी होती है, उससे ज्यादा पैदा हो रहे हैं।
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इनकी बढ़ती आबादी का एक कारण यह है कि आवारा कुत्ते पकड़ने पर कानूनी प्रतिबंध है। इनका सिर्फ बंध्याकरण किया जा सकता है। इसके लिए भी शहर में एक ही एबीसी सेंटर इंदिरानगर के जरहरा में है। यहां रोजाना करीब 50 कुत्तों की नसबंदी हो पाती है।
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...तो चार लाख पहुंच जाती संख्या
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा का कहना है कि नसबंदी अभियान न चलता तो इस समय आवारा कुत्तों की आबादी करीब चार लाख होती। एक मादा कुत्ता वर्ष में दो बार बच्चे देती है और एक बार में कम से कम छह से 10 तक बच्चे होते हैं। औसतन इनमें से आधे जीवित रहते हैं।




नए वर्ष में शुरू होगा नया सेंटर

डा. अभिनव का कहना है कि आवारा कुत्तों की आबादी पर रोक लगाने को नया एबीसी सेंटर अमौसी क्षेत्र में कान्हा उपवन के आगे बनाया जा रहा है। इसका 60 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। अक्तूबर तक यह तैयार हो जाएगा और नए साल में टेंडर करके संचालन शुरू करा दिया जाएगा। यहां रोजाना 50 कुत्तों की नसबंदी हो सकेगी। साथ ही यहां एक साथ 300 कुत्तों को रखा जा सकेगा। नसबंदी के बाद एक कुत्ते को करीब आठ दिन रखना पड़ता है। इसके बाद उसे उसी इलाके में छोड़ा जाता है, जहां से लाया जाता है। कुत्तों की आबादी को लेकर नए सिरे से गणना भी कराई जाएगी। इसके लिए पशुपालन विभाग को पत्र भी भेजा गया है।

डालीगंज में सड़क पर घूमते कुत्ते।

डालीगंज में सड़क पर घूमते कुत्ते।

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