संपत्ति के नामांतरण में अब खर्च होगा पहले से ज्यादा धन, एलडीए वीसी ने जारी किया आदेश
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रीसेल में संपत्ति खरीदने के बाद तुरंत नामांतरण नहीं कराया तो अब अधिक पैसा खर्च करना पड़ सकता है। एलडीए वीसी ने आदेश कर दिया है कि आवेदन के समय के डीएम सर्किल रेट पर निकाली संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत शुल्क देना होगा।
वीसी अभिषेक प्रकाश के आदेश में कहा गया कि 2018 के शासनादेश में नामांतरण को जनहित गारंटी कानून से जुड़े होने के चलते ऑनलाइन किया गया है। शासनादेश की बिंदु संख्या 1ब में कहा गया कि स्टांप शुल्क जिस मूल्य पर लिया जाता है, उसका एक प्रतिशत लिया जाएगा।
इसका आशय है कि वर्तमान में जिस मूल्यांकन पर स्टांप शुल्क की गणना की जा रही है उसी के आधार पर नामांतरण शुल्क जमा कराया जाए। अभी इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। ऐसे में शासनादेश मुताबिक नामांतरण शुल्क लिया जाए।
आवेदकों की होगी मुसीबत
शासनादेश के बाद से एलडीए नामांतरण के आवेदन ऑनलाइन ले रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि आवेदन के समय ही शुल्क की गणना ऑनलाइन पोर्टल कर देता है। अंतिम रजिस्ट्री में आंकी संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत शुल्क बता दिया जाता है।
ऐसे में अगर कोई आवेदन वर्ष 2010 (उदाहरण स्वरूप) में खरीदी संपत्ति का नामांतरण कराने आता है तो ऑनलाइन पोर्टल पर जमा कराया गया शुल्क कम होगा। वहीं, 2021 की दरों को आधार मानते हुए अंतर के नामांतरण शुल्क को जमा कराना होगा। ऐसे में फिर से ऑफलाइन गणना करानी होगी।
ऑनलाइन सिस्टम में भी हो बदलाव
आदेश के मुताबिक नामांतरण शुल्क का आकलन ऑनलाइन पोर्टल पर भी आवेदन के समय के डीएम सर्किल रेट के मुताबिक किया जाए। ऐसे में आवेदक को एलडीए में नामांतरण के समय दोबारा ऑफलाइन गणना और एक बार फिर शुल्क जमा कराने के झंझट से बचाया जा सकेगा।