शोहदा-ए-कर्बला से रोशन हुए जलसे
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मोहर्रम की पहली तारीख पर शहर की मस्जिदों और मदरसों में भी जलसों का दौर शुरू हो गया। कहीं शोहदा-ए-कर्बला तो कहीं शोहदा-ए-इस्लाम को याद किया गया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
रविवार को मौलवीगंज में मोमिन अंसार सभा की ओर से एक जलसा हुआ।
जलसे को मोहम्मद अकरम अंसारी ने संबोधित किया। कहा कि रसूल अल्लाह के मानने वाले एकजुट हों और इस्लाम की तरक्की के बारे में सोचें।
उन्होंने कहा कि इस्लाम कठरपंथी मजहब नहीं। यहां मोहब्बत और भाईचारा है। कुर्बानी पेश करने का जज्बा है। उन्होंने कहा कि यही बात साबित करते हुए नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन ने अपनी व अपने साथियों के साथ राहे हक में कुर्बानी पेश की।
उन्होंने कहा कि कर्बला की शहादत को समाज सबक के तौर पर अपना ले तो सारी बुराइयों से पाक हो जाएगा।
सुन्नी बोर्ड आफ इंडिया के निजामबाग में जलसे को शहाबुद्दीन खान ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि कर्बला अमन व सलामती का पैगाम देती है। मस्जिद सुब्हानिया में जलसा शोहदा-ए-इस्लाम आयोजित हुए।