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‘भारत माता की जय’ किसी पर थोपेंगे नहीं: भागवत

Tue, 29 Mar 2016 02:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 29 Mar 2016 02:03 AM IST
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mohan bhagwat inaugrates kisaan sangh building in lucknow
मोहन भागवत - फोटो : amar ujala

‘भारत माता की जय’ बोलने को लेकर छिड़ी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत ने साफ कहा है कि इस नारे को किसी पर थोपने की जरूरत नहीं है। बल्कि हमें अपने आदर्शों से ऐसे भारत का निर्माण करना होगा कि लोग खुद ही ‘भारत माता की जय’ बोलने लगें।

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लखनऊ में सोमवार को किसान संघ के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण के मौके पर उन्होंने कहा कि संघ का काम किसी को जीतना या उस पर अपना विचार थोपना नहीं है। हमें अपने आदर्शों व आचरण से ऐसा काम करना है कि लोग खुद ही हमारे रास्ते पर आ जाएं।
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यह काम कथनी-करनी में अंतर खत्म करके ही किया जा सकता है। यह फर्क खत्म न हुआ तो कोई भी हमारी बात नहीं मानेगा। भागवत ने रविवार को कोलकाता में भी कहा था कि हमें अपनी जिंदगी में ही भारत को जीना होगा।
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क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान
भागवत का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि कोई मेरे गर्दन पर छुरा रख देगा तो भी ‘भारत माता की जय’ नहीं बोलूंगा। हमारा संविधान भी कहीं नहीं कहता की ‘भारत माता की जय’ बोलना जरूरी है।

... ताकि पूरी दुनिया कहे ‘भारत माता की जय’

mohan bhagwat inaugrates kisaan sangh building in lucknow

भागवत ने कहा कि हमें ऐसे भारत का निर्माण करना होगा कि पूरी दुनिया खुद ही ‘भारत माता की जय’ बोलने लगे। संघ का काम देशभर में भारतीय दर्शन और संस्कृति के आधार पर कार्यकर्ताओं का समूह खड़ा करना है। हम इसीलिए स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित भी करते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों को ध्यान रखना है कि भाऊराव, रज्जू भैया, दीनदयाल, सुंदर सिंह भंडारी, अटल बिहारी वाजपेयी या नाना जी देशमुख जैसे लोगों ने किसी पर विचार थोपकर या लादकर अपना स्थान नहीं बनाया।

उन्होंने संघ के स्वयंसेवक होने के नाते उस दर्शन और आचरण से यह मुकाम हासिल किया कि लोग उन्हें आदर्श मानने लगे।

इस विचारधारा पर काम करने वाले आज तमाम संगठन हैं, जिन्हें संघ परिवार का नाम भी दे दिया जाता है। यह सभी स्वतंत्र संगठन हैं। लेकिन सभी इस विचार के आधार पर काम करने वाले हैं।

इसलिए उन्हें एक मान लिया जाता है। संघ की कोशिश है कि ऐसे ही और समूह या संगठन तैयार हों। जिनसे भारत की पहचान बने।

उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन, संस्कृति और इसके विचारों के आधार पर देश भर में कार्यकर्ताओं का समूह खड़ा करना ही संघ का काम है।

दुनिया तीसरे रास्ते की तलाश में

mohan bhagwat inaugrates kisaan sangh building in lucknow

संघ प्रमुख ने कहा कि दुनिया ने ईश्वर में विश्वास करने वाले रास्ते पर और मनुष्य में विश्वास करने वाले दोनों रास्तों पर चलकर देख लिया। उसे अब किसी ऐसे तीसरे रास्ते की तलाश है जो उसे शांति और संतुष्टि दे। यह रास्ता भारतीय दर्शन से मिल सकता है।

भारतीय दर्शन ही ऐसा है जो कहता है कि मनुष्य का काम सिर्फ अपना पेट भरना नहीं बल्कि दूसरों के पेट का भी ध्यान रखना है।

पर, इसके लिए हमें भारतीय दर्शन व संस्कृति के रास्ते पर चलने वाले कार्यकर्ताओं के समूह तैयार करने होंगे जो संपूर्ण दुनिया को राह दिखाने वाले इस दर्शन के आधार पर भारत का निर्माण कर सके। संघ इसी काम में जुटा है।

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