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मनरेगा घोटालाः कानून पर भारी पड़े करोड़ों के खिलौने

Sat, 01 Feb 2014 08:47 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 01 Feb 2014 08:47 AM IST
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MNREGA scam violated norms

हाईकोर्ट के आदेश पर मनरेगा घोटाला की परत खुलेंगीं। जांच के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों, स्थानीय नेताओं और दलालों ने मनरेगा में कानून को ताक पर रख दिया।

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कानून को अपनी जेबें भरने के लिए ताक पर रखा गया। कहीं करोड़ों के खिलौने खरीद लिए गए तो कहीं लाखों रुपये के टेंट खरीद लिए गए, पर जांच में ये कहीं नहीं मिले।
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जिलों में लगभग 300 करोड़ रुपये का घोटाला होने के अनुमान है। सबसे बड़ा घोटाला सोनभद्र में हुआ। यही नहीं, अधिकारियों ने कैलेंडर और डायरियां छपवाकर बांटने पर करोड़ों रुपये खर्च दिखा दिया।
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अन्य तमाम ऐसे सामान खरीद डाले गए जिनकी न तो कोई जरूरत थी और न मनरेगा के नियमों में कोई व्यवस्था है।

ये घोटाले चर्चा में तब आए जब मनरेगा के क्रियान्वयन पर निगरानी के लिए गठित केंद्रीय रोजगार गारंटी परिषद के सदस्य संजय दीक्षित ने सितंबर 2009 में महोबा और गोंडा का दौरा किया।

दीक्षित ने 1 अक्तूबर 2009 को तत्कालीन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. सीपी जोशी को इनकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।

गोंडा की रिपोर्ट में खिलौनों और कैलेंडरों की खरीद, जॉब कार्ड धारक पुत्तीलाल की हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए 25 मजदूरों को 52 दिन की मजदूरी का भुगतान न किए जाने तथा इन मजदूरों से कराए गए कार्य को लेकर सवाल उठाया गया था।

केंद्र ने कसा शिकंजा
दीक्षित की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय की तत्कालीन संयुक्त सचिव अमिता शर्मा ने तत्कालीन ग्राम्य विकास आयुक्त से कार्रवाई का ब्यौरा मांगा, लेकिन केंद्र को रिपोर्ट नहीं भेजी गई।

केंद्र ने 30 नवंबर 2009 को ग्राम्य विकास विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर चेतावनी दी कि जांच व कार्रवाई से केंद्र को अवगत न कराया गया तो मनरेगा की धारा 27 (2) के तहत पैसा रोका जा सकता है।


चार साल पहले कार्रवाई
केंद्र के कठोर रुख के बाद 30 मार्च 2010 को पहली बार सरकार ने कार्रवाई की। तीन सीडीओ, छह परियोजना निदेशक सहित 21 अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित करते हुए चित्रकूट व सुल्तानपुर के तत्कालीन डीएम पर कार्रवाई की घोषणा हुई। जब कार्रवाई की बात आई तो फिर उसमें हीला-हवाली होने लगी।

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