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यूपी: मनरेगा श्रमिकों को तीन महीने से नहीं हुआ मजदूरी का भुगतान, कोरोना के कारण आर्थिक तंगी से बढ़ रही परेशानी

Thu, 26 Mar 2020 09:27 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 26 Mar 2020 09:27 AM IST
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MNREGA labours didnt get wages since three months faces financial problems due to corona virus
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश में महात्मा गांधी नरेगा योजना के श्रमिकों को तीन महीने से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। लाखों श्रमिकों की मजदूरी का करीब 650 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। कोरोना वारयस के चलते हुए लॉक डाउन में मनरेगा श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं होने से वे तंगी के दौर से गुजर रहे हैं।

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प्रदेश में 1 करोड़ 74 लाख 20 हजार मनरेगा जॉब धारक परिवार हैं और 2 करोड़ 48 लाख 55 हजार श्रमिक हैं। इनमें से 88 लाख 64 हजार सक्र्तिय जॉबकार्ड धारक हैं और 1 करोड़ 12 लाख 56 हजार सक्र्तिय श्रमिक हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में श्रमिकों के परिश्रम से 5 लाख 92 हजार 032 काम पूरे हो गए हैं। 
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जबकि 9 लाख 7 हजार काम अभी चल रहे हैं। श्रमिकों को प्रतिदिन 181.77 रुपये मजदूरी का भुगतान होना है। लेकिन बीते तीन महीने से श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है। उधर, मनरेगा के तहत कार्यरत 37 हजार ग्राम रोजगार सहायकों, तकनीकी सहायकों, कंप्यूटर ऑपरेटर और अकाउंटेंट को भी महीनों से मानेदय का भुगतान नहीं हुआ है।
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श्रमिकों और कर्मचारियों को मजदूरी व मानदेय नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लॉक डाउन के दौरान श्रमिकों के परिवारजन दूसरी जगह मजदूरी पर भी नहीं जा रहे हैं। श्रमिक परिवारों के जो सदस्य बाहर रहते थे वे भी लौट आ रहे हैं। ऐसे में श्रमिकों के समक्ष भरण-पोषण की भी परेशानी हो रही है।

गांव में बढे़गी मनरेगा की मांग
जानकारों का मानना है कि कोरोना के चलते शहर में काम कर रहे श्रमिकों और युवाओं के गांव लौटने का सिलसिला तेजी से शुरू हो गया है। गांवों में श्रमिक वापस लौटने से अब मनरेगा में काम की मांग बढ़ेगी। मौजूदा हालात में गांवों से शहर की ओर पलायन रोकने का मनरेगा सशक्त माध्यम भी बन सकता है। यहां बताना दिगर होगा कि केंद्र सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए प्रदेश को 26 करोड़ मानव दिवस रोजगार सृजन का लक्ष्य दिया है।

मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी बढ़ी
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए मनरेगा श्रमिकों की मदजूरी दस प्रतिशत से अधिक बढ़ाई है। उत्तर प्रदेश में अभी मनरेगा श्रमिकों को करीब 182 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। एक अप्रैल 2020 से मनरेगा श्रमिकों को 201 रुपये मजदूरी मिलेगी।

कुशल श्रमिकों का मानदेय नहीं बढ़ा
केंद्रीय रोजगार गारंटी परिषद के पूर्व सदस्य संजय दीक्षित का कहना है कि मनरेगा में अब अकुशल श्रमिकों को कुशल श्रमिक (सुपरवाइज) से ज्यादा मानदेय मिलेगा। सुपरवाइजर का मानदेय छह हजार रुपये महीने है, जबकि अकुशल श्रमिक को एक महीने काम करने पर 6030 रुपये मिलेंगे।

इनका कहना है कि लॉक डाउन के समय श्रमिकों के पास पैसा नहीं होगा तो वे घर कैसे चलाएंगे। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी योजनाओं के लिए काफी बजट दिया है, इस विपत्ति के समय उस बजट को मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी के लिए उपयोग करना चाहिए। 

वहीं ग्राम विकास आयुक्त के.रवींद्र नाईक ने बताया कि मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी का शत प्रतिशत पैसा भारत सरकार से आता है, भारत सरकार से करीब 650 करोड़ का बजट मिलना है। प्रदेश सरकार ने बजट की मांग कर रखी है, बजट जल्द मिलने की उम्मीद है।

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