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असुविधा का केंद्र बने जनसेवा केंद्र

Fri, 02 Aug 2013 01:17 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 02 Aug 2013 01:17 AM IST
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misuse of jan seva kendra

ग्रामीणों को ऑन लाइन राजस्व से जुड़े प्रमाणपत्र मुहैया कराने के लिए शुरू हुए सहज जनसेवा केंद्र एक साल में ही शो-बीस बन गए हैं।

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संसाधनों की कमी व कमजोर कनेक्टिविटी से जूझ रहे इन केंद्रों पर प्रशासनिक उपेक्षा भी भारी पड़ रही है।

इससे ही जिले के सभी आठ विकास खंडों में संचालित किसी भी सहज जनसेवा केंद्र पर 26 सेवाएं मुहैया कराने का दावा अधूरा बना है।

जिन ग्राम पंचायतों में यह केंद्र संचालित भी है, वहां महज गिनीचुनी सेवाओं के लिए आवेदन की सुविधा है।

इनके निस्तारण की तय अधिकतम सीमा 20 दिन है, लेकिन आवेदक 40 दिन तक चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

मालूम हो कि प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष एक अगस्त से ही ई-गवर्नेंस सेवा के जरिए गांव में ही सूचीबद्ध सेवाओं के लिए ऑन लाइन आवेदन कर प्रमाण पत्र मुहैया कराने के लिए करीब सवा सौ जनसेवा केंद्र शुरू करवाए थे।
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इन केंद्रों पर पहुंच कर बस एक क्लिक में सरकारी सेवाओं का फायदा निर्धारित बीस दिन में दिलाने का दावा भी था।

साथ ही केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से जिले में सहज एनजीओ को सेवा केंद्रों का संचालन दिया गया था।

मोहनलालगंज के मुरली नगर स्थित जनसेवा केंद्र में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले अभय सिंह बताते हैं कि 40 दिन बाद भी प्रमाणपत्र न मिलने के बाद तहसील जाकर बनवाना पड़ा।
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इसी तरह अतरौली में बने केंद्र पर जाति प्रमाणपत्र के आवेदक विपिन यादव हो अथवा ढेढेमऊ गांव के राम प्यारे लंबे इंतजार के बाद तहसील की शरण ले रहे हैं।

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