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लखनऊ के डॉक्टर की बदजुबानी, बोले मरीज के हाथ कटवा दूंगा

Tue, 25 Oct 2016 12:44 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 25 Oct 2016 12:44 PM IST
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misbehave of doctor in civil hospital
मरीज अभय - फोटो : amar ujala

वीआईपी अस्पताल कहे जाने वाले सिविल अस्पताल के ईएमओ डॉ. सुरूर अली ने इलाज के लिए पहुंचे एक बर्न मरीज को बिना इलाज बेरहमी से भगा दिया। बुरी तरह झुलसा मरीज एक घंटे तक पार्किंग में खड़ी कार में तड़पता रहा। 

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मामले की जानकारी अस्पताल के सीएमएस को मिली तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर मरीज को भर्ती कराया। सीएमएस के जाते ही ईएमओ मरीज के पिता पर भड़क गया और गालियां देते हुए कहा कि जला हुआ मरीज है इसके दोनों हाथ कटवा दूंगा। 
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डॉक्टर के गुस्से और धमकी से परिवारीजन डरे सहमे हुए हैं। बाराबंकी, जलुहामऊ  रामनगर के अभय कुमार (28) मुंबई में निजी कंपनी में काम करते हैं। पिता राजकुमार तिवारी ने बताया कि करीब दस दिन पहले खाना बनाते वक्त स्टोप फट गया, जिससे शरीर पीठ और हाथ बुरी तरह जल गया। 
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मुंबई के अस्पताल में इलाज से राहत नहीं मिली। चार दिन पहले घर आया तो निजी अस्पताल में दिखाया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। राजकुमार ने बताया कि  सोमवार शाम करीब चार बजे सिविल अस्पताल पहुंचे तो ईएमओ डॉ. सुरूर अली ने मरीज को देखने के बाद बाहर भगा दिया।

अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीएस नेगी को जानकारी दी गई तो डॉ. सुरूर अली ने मरीज को भर्ती के लिए लिखा। शाम करीब पांच बजे अभय को बर्न वार्ड में भर्ती किया गया। 

मरीजों की भर्ती के नाम पर जमकर वसूली

misbehave of doctor in civil hospital
डेमो

राजकुमार का आरोप है कि सीएमएस को जानकारी देने से गुस्साए डॉ. सुरूर ने राजकुमार को गाली देते हुए कहा कि तेरे बेटे का हाथ जला है इसके दोनों हाथ कटवा दूंगा। राजकुमार का आरोप था कि डॉक्टर ने पहले तो भर्ती करने से मना किया।

बाद में भर्ती किया तो अपशब्द कहते हुए धमकी दी कि इलाज में नेतागिरी की है तो अब तुम्हारे बेटे के दोनों हाथ कटवा दूंगा। मौके पर पहुंचे नर्सिंग स्टाफ, फॉर्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों ने समझा बुझाकर मामला शांत कराया।

सिविल अस्पताल में मरीजों की भर्ती के नाम पर जमकर वसूली होती है। इमरजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, आउटडोर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर दोपहर दो बजे के बाद मरीजों के तीमारदारों से 500 से 1000 रुपये की वसूली करते हैं इसके बाद मरीजों को भर्ती किया जाता है। 

जब से डेंगू और बुखार का कहर फैला है तब से दोपहर दो बजे के बाद से अगले दिन सुबह आठ बजे तक मरीजों से भर्ती के नाम पर डॉक्टर से लेकर कर्मचारी वसूली करते हैं। इतना ही नहीं इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के नाम पर भी 50 से 100 रुपये की वसूली होती है।

सिविल अस्पताल में निदेशक डॉ. एचएस दानू, सीएमएस डॉ. डीएस नेगी और एमएस डॉ. आशुतोष दुबे हैं। अस्पताल में तीन-तीन अधिकारियों की तैनाती है, लेकिन डॉक्टर पर निगरानी किसी की नहीं है। डॉक्टर इमरजेंसी से आए दिन गंभीर मरीजों को भगा रहे हैं और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। 

‌स‌िव‌िल अस्पताल में आए ‌द‌िन होती हैं ऐसी घटनाएं

misbehave of doctor in civil hospital
डेमो - फोटो : अमर उजाला
 इन सवालों का कौन देगा जवाब
-बर्न के गंभीर मरीज को इमरजेंसी से क्यों भगाया गया
-बेड नहीं था तो दूसरे अस्पताल रेफर क्यों नहीं किया
-इमरजेंसी में आए मरीज को प्राथमिक उपचार क्यों नहीं मिला
-क्या अधिकारियों के दबाव में ही मरीजों को भर्ती किया जाता है

सिविल अस्पताल में आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। बीती 17 अक्तूबर रविवार को अस्पताल में संविदा की सफाई कर्मचारी शालू (36) पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल पहुंची थी तो डॉक्टर ने भर्ती नहीं किया था। 

रात भर शालू इमरजेंसी के बरामदे में तड़पती रही और इलाज के अभाव में सुबह छह बजे उसकी मौत हो गई। घटना से गुस्साए साथी सफाई कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। इस पर अधिकारियों ने प्रदर्शन करने पर नौकरी से हटाने की धमकी देकर उन्हें शांत करा दिया। कर्मचारियों का आरोप था कि ईएमओ को पैसे न मिलने के चलते शालू को भर्ती नहीं किया था।

इमरजेंसी में बर्न मरीज आया तो इसका फैसला मुझे करना है कि उसे भर्ती करूंगा या नहीं। मरीज या तीमारदार के कहने पर मरीज को भर्ती नहीं करूंगा। इस मामले में मैं अपने अधिकारियों को जवाब दे दूंगा।- डॉ. सुरूर अली, ईएमओ, सिविल अस्पताल

बर्न मरीज को इमरजेंसी में तैनात ईएमओ डॉ. सुरूर अली के वापस करने की सूचना मिली थी। इसके बाद खुद मैं वहां पहुंचा था और मरीज को भर्ती कराया था। मरीज के परिवारीजनों के साथ गाली गलौज या हाथ काटने की धमकी दी गई है तो इसकी लिखित शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। मरीजों से अभद्रता किसी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।- डॉ. डीएस नेगी, सीएमएस, सिविल अस्पताल
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