फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Meter readers are generating fake bills, see an exclusive story.

Fake bills: जनता को फर्जी बिल का नया 'करंट' दे रहे मीटर रीडर, एक लाख रुपये तक लगा दी चपत

Mon, 13 Jun 2022 05:56 PM IST
ishwar ashish नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 13 Jun 2022 05:56 PM IST
सार

बिलिंग एजेंसी मीटर रीडरों एवं कलेक्शन केंद्र ऑपरेटरों की सांठगांठ से उपभोक्ताओं से धन उगाही का खेल कर रहे हैं और उपभोक्ताओं से भारी वसूली कर रहे हैं।

 

विज्ञापन
Meter readers are generating fake bills, see an exclusive story.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैसे तो फर्जी बिल बनाकर उगाही का खेल तो पुराना है, पर अब इसमें एक नई तरकीब भी जुड़ गई है। उगाही के लिए जो नया ट्रेंड आया है, उसमें मीटर रीडर खुद गलत रीडिंग फीड करने के बजाय दूसरे डिवीजन के ऑनलाइन बिलिंग केंद्र के कलेक्शन कर्मी से सांठगांठ करके सिस्टम में फर्जी यूनिट फीड करवाते हैं। इसके बाद रीडिंग को दुरुस्त कराने के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। ये ट्रेंड अप्रैल से ही शुरू हुआ है। खपत के मुकाबले कहीं ज्यादा का बिल आने पर उपभोक्ता उपकेंद्र से लेकर उपखंड तक दौड़ लगाते रहते हैं। कुछ शिकायतों की जांच हुई तो ये फर्जीवाड़ा सामने आया।

विज्ञापन


पुराने मामलों में सीधे तौर पर मीटर रीडर गलत रीडिंग दर्ज कर देते थे। इसमें कोई आंच आने पर उनकी गर्दन नप जाती थी। क्योंकि वे सीधे तौर पर पकड़ में आ जाते थे। लेसा प्रबंधन ने इस पर अंकुश लगाने के लिए बिल जमा करने वालों को खास आईडी नंबर अलॉट कर दिया। बिल में उसे बनाने वाले का आईडी नंबर भी दर्ज होता है।
विज्ञापन


यह व्यवस्था तो फर्जीवाड़ा करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए की गई, पर मीटर रीडरों ने इनसे ही सांठगांठ शुरू कर फर्जी रीडिंग दर्ज कराना शुरू कर दिया। फर्जी रीडिंग दर्ज होने के बाद मीटर रीडर का खेल शुरू होता है। वह बिल तैयार होने के बाद संबंधित उपभोक्ता के पास जाकर उसे दुरुस्त कराने का ऑफर देता है। ऐसा नहीं है कि ऐसे मामले सामने नहीं आए। आए तो पर एसडीओ एवं एक्सईएन ऐसे बिल को संशोधित कराकर मामले का निपटारा करा देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में फर्जीवाड़ा का प्रकरण दब जाता है और खेल चलता रहता है। कैंट एसडीओ पंकज पांडेय एवं रेजीडेंसी एसडीओ आशीष कुमार ने ऐसे ही मामलों में उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया तो आईडी नंबर के जरिए उगाही का खेल खेलने वाले दो कर्मचारी बेनकाब हुए। इनमें से एक मामला सुभाष मोहाल सदर निवासी नरेश चंद्र द्विवेदी का था, जिनका एक लाख रुपये का फर्जी बिल बना दिया गया था।

ये मामले बताते हैं कि कैसे चल रहा है खेल

केस-एक: मीटर में 2383 यूनिट बिल में दर्ज करा दिया 23,691
कैंट उपखंड के सदर निवासी कारोबारी राकेश कुमार सिंह 21,691 यूनिट का बिजली बिल भेजा गया तो वे चौंके। चौंकना भी लाजिमी था, क्योंकि दर्शाए गए यूनिट के हिसाब से उनका डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा का बिल आया था। बिल नहीं जमा किया तो कनेक्शन काट दिया गया। शिकायत पर जांच हुई तो मीटर में 2393 यूनिट ही रीडिंग पाई गई। मीटर रीडर ने मनमाने तौर पर बिल में 23,681 यूनिट फीड करा दी थी।

केस- दो: आरोप : 500 रुपये की नहीं दी घूस तो 7423 का बनवा दिया बिल
रेजीडेंसी उपखंड के तहत दुगांवा निवासी दिनेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि उन्होंने मीटर रीडर को 500 रुपये की घूस नहीं दी, तो उसने मनमाने तौर पर खपत की रीडिंग 819 यूनिट दर्ज करा दी। इससे उनका 7423 रुपये का बिल बन गया। शिकायत पर एसडीओ आशीष कुमार ने जांच की तो आरोप सही पाया गया। एसडीओ ने इसी महीने उनका बिल संशोधित किया जो महज 2392 रुपये का बना।

एक्सईएन बता रहे हैं कैसे होता है ये खेल
रेजीडेंसी के एक्सईएन केके यादव से हमने ऐसे मामलों को लेकर सवाल किए। वे बताते हैं, एक मामला सामने आया था। हनुमान सेतु बिलिंग केंद्र पर कार्य कर चुके ऑपरेटर प्रेम वर्मा राजभवन खंड के क्लाइड रोड बिलिंग केंद्र पर तैनात था। इस प्रेम की एजेंसी के बहुत से मीटर रीडरों से सांठगांठ थी। सुविधा शुल्क नहीं पाने पर ये रीडर सिकंदरबाग चौराहे के पास स्थित बिलिंग केंद्र से ऑपरेटर प्रेम वर्मा के जरिये हरिहरपुर, कैंट, रेजीडेंसी आदि उपकेंद्र इलाके के उपभोक्ताओं के फर्जी बिल बनवा देते थे।

मामला सामने आया तो ऑपरेटर, मीटर रीडर हुए बर्खास्त

एसडीओ ने जांच के दौरान यूजर आईडी (ईपीआरईएमवी) से ऑपरेटर प्रेम को पकड़ा तो मेधाज कंपनी ने उसे बर्खास्त कर दिया। एसडीओ के मुताबिक तीनों उपकेंद्र इलाके में अब तक 70-80 उपभोक्ताओं के फर्जी बिल सिकंदरबाग चौराहे वाले बिलिंग केंद्र से बनना सामने आए हैं। टीडीएस कंपनी ने मीटर रीडर राजेंद्र कुमार को भी बर्खास्त कर दिया है। इनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

कई बिल कलेक्शन सेंटर के ऑपरेटर रडार पर
मध्यांचल निगम के एक अधिकारी ने बताया कि सुभाष पार्क महानगर, निरालानगर, अहिबरनपुर, इंजीनियरिंग कॉलेज, विकासनगर, फैजुल्लागंज, शिवपुरी चिनहट, विक्टोरिया चौक, राधा ग्राम, अपट्रॉन एवं ऐशबाग स्थित बिलिंग कलेक्शन सेंटर के कुछ ऑपरेटर रडार पर हैं। ये ऑपरेटर भी अपनी आईडी के जरिए फर्जी बिल बनाए हैं।

फर्जी बिल बनाने वालों को छोड़ेंगे नहीं
लेसा सिस गोमती जोन के मुख्य अभियंता विपिन जैन का कहना है कि यूपी पावर कॉर्पोरेशन उपभोक्ताओं को सही बिजली बिल मुहैया कराने के लिए नित नए उपाय कर रहा है। एजेंसी कर्मी अपने फायदे के लिए फर्जी रीडिंग फीड कर रहे हैं। ऐसे कर्मियों को छोड़ा नहीं जाएगा। जो भी दोषी मिलेगा, सीधे बर्खास्त होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed