इस तरह बेहतर हो सकती है आपकी भी याददाशत
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हमारे दिमाग तक सूचनाएं कई जटिल कोड की शक्ल में पहुंचती हैं। इन कोडों को स्थाई स्मृति में संग्रहित करने के लिए दिमाग को जटिल गणनाओं से गुजरना होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में बहुत सारी सूचनाएं संग्रह नहीं हो पाती और हम चीजों को याद करने पर भी रिकॉल नहीं कर पाते।
ये बातें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुके मेमोरी गुरू वीरेंद्र मेहता ने मंगलवार को एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय मेमोरी एनहान्समेंट कार्यशाला में कहीं।
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल एंड एप्लाईड साइंस की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने कहा कि यदि इन सूचनाओं को सरलीकृत किया जा सके तो याद रखने में परेशानी नहीं होगी।
याद रखने के वैज्ञानिक तरीके बताए
वीरेंद्र मेहता ने छात्र-छात्राओं को याद्दाश्त बेहतर करने के लिए वैज्ञानिक तरीके सिखाए। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को पेज नंबर सहित पूरी तरह कंठस्थ करने के लिए मशहूर वीरेंद्र मेहता ने छात्रों को 30 सेकंड में 25 शब्द याद करने के लिए कहा जिसे वह नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने उसे वैज्ञानिक तकनीक से करके दिखाया।
कार्यशाला के दौरान छात्र-छात्राओं के साथ विभिन्न विभागों के अध्यक्ष सहित एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल एंड एप्लाईड साइंस की निदेशिका मंजू अग्रवाल, सहित पूजा वर्मा, कुमकुम रे, आशुतोष चौबे, दीप्ति पांडे राना उपस्थित रहे।