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राममंदिर का निर्माण कार्य शुरू : ट्रस्ट के अध्यक्ष व पदाधिकारियों ने किया पूजन-अर्चन, शुरू हुई नींव की खोदाई
Thu, 21 Jan 2021 06:43 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 21 Jan 2021 06:43 PM IST
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श्री राम जन्मभूमि के गर्भगृह स्थल पर नीव की खोदाई से पहले की गई पूजा अर्चना
- फोटो : amar ujala
श्रीराम जन्मभूमि के गर्भ गृह स्थल पर बृहस्पतिवार को सुबह सवा दस बजे विधिवत पूजन-अर्चन के साथ राममंदिर निर्माण के लिए नींव की खोदाई प्रारंभ हो गई है। इसी के साथ रामभक्तों में खुशी और उल्लास छा गया है, इस पल का कई माह से इंतजार था। कई दिन से हटाए जा रहे मलबे के बाद नींव के लिए इंजीनियरों ने सबसे पहले निशान लगाए, फिर वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के बीच राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र सहित ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने गर्भगृह स्थल पर पूजन कर फावड़ा चलाकर कार्यारंभ कराया।
अभी तक रामलला के गर्भगृह स्थल के चारों तरफ का मलबा हटाया जा रहा था। करीब सात माह तक इंजीनियरों ने यहां की मिट्टी और नींव निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री को लेकर पड़ताल की। जिसके बाद बृहस्पतिवार से राममंदिर की नींव के लिए खोदाई का कार्य औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गया। जहां मंदिर बनना है, वहां गहराई तक भुरभुरी बालू के कारण नींव के काम में दिक्कत आ रही थी। पहले नींव में सीमेंट, मोरंग व गिट्टी के 100 मीटर गहरे 1200 पिलर से नींव बननी थी, लेकिन टेस्ट के दौरान लोड बढ़ने पर सितंबर माह में पाइलिंग फेल हो गई। जिसके बाद पत्थर से प्राचीन पद्घति पर नींव तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए देश की करीब दस इंजीनियरिंग संस्थाओं ने सात माह तक मंथन के बाद डिजाइन फाइनल किया।
राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व रिटायर्ड आईएएस नृपेंद्र मिश्र बृहस्पतिवार की सुबह 9:30 बजे श्री राम जन्मभूमि पहुंचे। इसके बाद जहां-जहां खोदाई होनी है, वहां निशान लगाए गए। इसके बाद 10:15 बजे रामलला के गर्भगृह स्थल पर वैदिक पंडितों ने नींव का पूजन कराया गया। नृपेंद्र मिश्र सहित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, रामजन्मभूमि के सुरक्षा सलाहकार केके शर्मा, विहिप के संरक्षक दिनेश चंद्र सहित अन्य ट्रस्टियों की मौजूदगी में पूजन का कार्य संपन्न हुआ। इसी के साथ राममंदिर के नींव का काम भी प्रारंभ हो गया। मिश्र ने पूरे रामजन्मभूमि परिसर का निरीक्षण किया। मंदिर निर्माण के दौरान परिसर में आने वाली निर्माण सामग्री और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों से चर्चा की।
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राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने नींव खोदाई शुरू कराने के बाद परिसर के विश्वामित्र आश्रम स्थित एलएंडटी के कार्यालय में करीब एक घंटे तक कार्यदाई संस्था एलएंडटी, टाटा कंसलटेंसी व अन्य तकनीकी एजेंसियों के इंजीनियरों के साथ ट्रस्ट के पदाधिकारियों की मौजूदगी में राममंदिर निर्माण को लेकर आगे की कार्ययोजना की जानकारी ली। बैठक में राममंदिर निर्माण के लिए आने वाले मजदूरों के रहने आदि की व्यवस्था पर भी विचार विमर्श हुआ।
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अभी तक रामलला के गर्भगृह स्थल के चारों तरफ का मलबा हटाया जा रहा था। करीब सात माह तक इंजीनियरों ने यहां की मिट्टी और नींव निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री को लेकर पड़ताल की। जिसके बाद बृहस्पतिवार से राममंदिर की नींव के लिए खोदाई का कार्य औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गया। जहां मंदिर बनना है, वहां गहराई तक भुरभुरी बालू के कारण नींव के काम में दिक्कत आ रही थी। पहले नींव में सीमेंट, मोरंग व गिट्टी के 100 मीटर गहरे 1200 पिलर से नींव बननी थी, लेकिन टेस्ट के दौरान लोड बढ़ने पर सितंबर माह में पाइलिंग फेल हो गई। जिसके बाद पत्थर से प्राचीन पद्घति पर नींव तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए देश की करीब दस इंजीनियरिंग संस्थाओं ने सात माह तक मंथन के बाद डिजाइन फाइनल किया।
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राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व रिटायर्ड आईएएस नृपेंद्र मिश्र बृहस्पतिवार की सुबह 9:30 बजे श्री राम जन्मभूमि पहुंचे। इसके बाद जहां-जहां खोदाई होनी है, वहां निशान लगाए गए। इसके बाद 10:15 बजे रामलला के गर्भगृह स्थल पर वैदिक पंडितों ने नींव का पूजन कराया गया। नृपेंद्र मिश्र सहित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, रामजन्मभूमि के सुरक्षा सलाहकार केके शर्मा, विहिप के संरक्षक दिनेश चंद्र सहित अन्य ट्रस्टियों की मौजूदगी में पूजन का कार्य संपन्न हुआ। इसी के साथ राममंदिर के नींव का काम भी प्रारंभ हो गया। मिश्र ने पूरे रामजन्मभूमि परिसर का निरीक्षण किया। मंदिर निर्माण के दौरान परिसर में आने वाली निर्माण सामग्री और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों से चर्चा की।
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राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने नींव खोदाई शुरू कराने के बाद परिसर के विश्वामित्र आश्रम स्थित एलएंडटी के कार्यालय में करीब एक घंटे तक कार्यदाई संस्था एलएंडटी, टाटा कंसलटेंसी व अन्य तकनीकी एजेंसियों के इंजीनियरों के साथ ट्रस्ट के पदाधिकारियों की मौजूदगी में राममंदिर निर्माण को लेकर आगे की कार्ययोजना की जानकारी ली। बैठक में राममंदिर निर्माण के लिए आने वाले मजदूरों के रहने आदि की व्यवस्था पर भी विचार विमर्श हुआ।
नींव खोदाई के बाद एनजीआरआई फिर करेगी मिट्टी की जांच
राममंदिर की नींव की खोदाई के दौरान जहां से प्राकृतिक मिट्टी मिलने लगेगी, वहीं से बुनियाद का काम प्रारंभ किया जाएगा। ऐसे में खोदाई होने के बाद एनजीआरआई हैदराबाद के विशेषज्ञों की टीम एक बार फिर मिट्टी की जांच करेगी। एनजीआरआई की जांच पूरी होने के बाद ही बुनियाद में पत्थर आदि लगाने का काम शुरू होगा। एनजीआरआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही मंदिर की नींव का नक्शा फाइनल हुआ है, अब फिर से मिट्टी की जांच रिपोर्ट के बाद पत्थर, मोरंग व अन्य सामग्री से नींव भरने का काम प्रारंभ होगा। एनजीआरआई की जांच मशीनें अभी भी परिसर में मौजूद हैं।
परकोटे पर उकेरेंगे रामायण की थीम
राममंदिर में बनने वाले वर्गाकार परकोटे में रामायण की थीम आकर्षण का केंद्र होगी। रामायण पर आधारित परकोटा परिसर की भव्यता को और बढ़ाएगा। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार दक्षिण भारतीय शैली में परकोटे का निर्माण कराया जाएगा। नींव का काम अब शुरू हो चुका है, शीघ्र ही परकोटा निर्माण भी शुरू कर दिया जाएगा। परकोटे को भव्यता प्रदान करने के लिए उस पर रामायण की थीम उकेरे जाने की योजना है।
परकोटे पर उकेरेंगे रामायण की थीम
राममंदिर में बनने वाले वर्गाकार परकोटे में रामायण की थीम आकर्षण का केंद्र होगी। रामायण पर आधारित परकोटा परिसर की भव्यता को और बढ़ाएगा। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार दक्षिण भारतीय शैली में परकोटे का निर्माण कराया जाएगा। नींव का काम अब शुरू हो चुका है, शीघ्र ही परकोटा निर्माण भी शुरू कर दिया जाएगा। परकोटे को भव्यता प्रदान करने के लिए उस पर रामायण की थीम उकेरे जाने की योजना है।
गर्भगृह का ऊपरी भाग ही होगा मंदिर का शिखर
राममंदिर निर्माण के लिए नींव खोदाई का कार्य औपचारिक रूप से प्रारंभ होने के बाद शीघ्र ही राममंदिर का स्वरूप भी सबके सामने आने लगेगा। श्रीराममंदिर 57 हजार 400 स्क्वायर फीट में बनेगा। एक साथ पचास हजार लोग मंदिर में पूजा कर सकेंगे। गर्भगृह का ऊपरी भाग ही मंदिर का शिखर होगा। वहीं पांचों गुंबदों के नीचे के हिस्से में चार हिस्से होंगे। इसमें सिंहद्वार, नृत्य मंडप, रंगमंडप बनेंगे। यहां श्रद्धालुओं के बैठने, विचरण करने और विविध कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्थान होगा।
गर्भगृह के फ्लोर पर सिर्फ रामलला विराजमान होंगे। उसके ऊपर वाले तल पर राम दरबार बनेगा, मंदिर की ऊंचाई बढ़ने पर तीसरा तल बनेगा, जो खाली रहेगा। प्रत्येक मंजिल करीब 20 फिट की होगी। तीसरी मंजिल को खाली रखा जाएगा। क्योंकि 60 फिट ऊपर जाकर दर्शन-पूजन करना भक्तों के लिए कठिन होगा। ट्रस्ट ने इस मंदिर का नाम श्रीरामजन्मभूमि मंदिर रखा है, जो सबसे अग्रभाग में सिंह द्वार पर दर्ज होगा। गर्भगृह और रंगमंडप के बीच गूढ़ मंडप बनेगा और इसके दाएं-बाए अलग-अलग कीर्तन व प्रार्थना मंडप होगा। गर्भगृह को छोड़ बाकी सभी मंडपों के आकार अब बढ़ा दिए गये हैं।
गर्भगृह के फ्लोर पर सिर्फ रामलला विराजमान होंगे। उसके ऊपर वाले तल पर राम दरबार बनेगा, मंदिर की ऊंचाई बढ़ने पर तीसरा तल बनेगा, जो खाली रहेगा। प्रत्येक मंजिल करीब 20 फिट की होगी। तीसरी मंजिल को खाली रखा जाएगा। क्योंकि 60 फिट ऊपर जाकर दर्शन-पूजन करना भक्तों के लिए कठिन होगा। ट्रस्ट ने इस मंदिर का नाम श्रीरामजन्मभूमि मंदिर रखा है, जो सबसे अग्रभाग में सिंह द्वार पर दर्ज होगा। गर्भगृह और रंगमंडप के बीच गूढ़ मंडप बनेगा और इसके दाएं-बाए अलग-अलग कीर्तन व प्रार्थना मंडप होगा। गर्भगृह को छोड़ बाकी सभी मंडपों के आकार अब बढ़ा दिए गये हैं।
ऐसा होगा मुख्य मंदिर
कुल क्षेत्रफल- 2.7 एकड़।
निर्मित क्षेत्र- 57400 स्क्वायर फीट।
मंदिर की लंबाई- 360 फीट।
मंदिर की चौड़ाई- 235 फीट।
शिखर सहित मंदिर की ऊंचाई-161 फीट।
कुल तलों की संख्या-3।
प्रत्येक तल की ऊंचाई-20 फीट।
मंदिर के भूतल में स्तंभों की संख्या-160।
मंदिर के प्रथम तल में स्तंभों की संख्या-132
मंदिर के दूसरे तल पर स्तंभों की संख्या-74
मंदिर में शिखर एवं मंडप की संख्या-5
मंदिर में द्वारों की संख्या-12
निर्मित क्षेत्र- 57400 स्क्वायर फीट।
मंदिर की लंबाई- 360 फीट।
मंदिर की चौड़ाई- 235 फीट।
शिखर सहित मंदिर की ऊंचाई-161 फीट।
कुल तलों की संख्या-3।
प्रत्येक तल की ऊंचाई-20 फीट।
मंदिर के भूतल में स्तंभों की संख्या-160।
मंदिर के प्रथम तल में स्तंभों की संख्या-132
मंदिर के दूसरे तल पर स्तंभों की संख्या-74
मंदिर में शिखर एवं मंडप की संख्या-5
मंदिर में द्वारों की संख्या-12