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Lucknow News: लिंब सेंटर में कूड़े के ढेर में पड़ी दवा हटी
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इसी तरह फेंकी गई थीं दवाएं।
लखनऊ। केजीएमयू के लिंब सेंटर में पांच लाख लाखों रुपये की दवा कबाड़ में फेंकने के मामले में प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। सोमवार को हरकत में आए प्रशासन ने खुले में पड़ी दवाओं को वहां से हटवा दिया। इतना ही नहीं, जिस कमरे में दवाएं रखी गई हैं, उसकी खिड़की पर पेपर चस्पाकर उसे ढक दिया गया है, जिससे अंदर रखी दवाएं बाहर से दिखाई न दें।
लिंब सेंटर में खुले हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) स्टोर के बाहर रविवार को बड़ी मात्रा में इंजेक्शन, विटामिन और पोषण संबंधी दवाएं खुले में पड़ी मिली थीं। दवाओं को न तो सुरक्षित भंडारण मानकों के तहत रखा गया था और न ही उनके निस्तारण अथवा वापसी की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
सोमवार को खबर छपने के बाद संबंधित अधिकारियों ने दवाओं को वहां से हटवा दिया। एचआरएफ प्रभारी इंचार्ज डॉ. कुमार शांतनु ने बताया कि अधिकांश दवाएं इसी माह एक्सपायर होने वाली थीं। उन्हें संबंधित कंपनियों को वापस भेजा जाना था। कर्मचारियों ने दवाओं को सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय खुले में फेंक रख दिया, जो लापरवाही है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। यह पता लगाया जाएगा कि दवाओं को खुले में रखने के लिए कौन जिम्मेदार था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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लिंब सेंटर में खुले हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) स्टोर के बाहर रविवार को बड़ी मात्रा में इंजेक्शन, विटामिन और पोषण संबंधी दवाएं खुले में पड़ी मिली थीं। दवाओं को न तो सुरक्षित भंडारण मानकों के तहत रखा गया था और न ही उनके निस्तारण अथवा वापसी की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
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सोमवार को खबर छपने के बाद संबंधित अधिकारियों ने दवाओं को वहां से हटवा दिया। एचआरएफ प्रभारी इंचार्ज डॉ. कुमार शांतनु ने बताया कि अधिकांश दवाएं इसी माह एक्सपायर होने वाली थीं। उन्हें संबंधित कंपनियों को वापस भेजा जाना था। कर्मचारियों ने दवाओं को सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय खुले में फेंक रख दिया, जो लापरवाही है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। यह पता लगाया जाएगा कि दवाओं को खुले में रखने के लिए कौन जिम्मेदार था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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