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संकट : विदेश से मेडिकल डिग्री लेने वाले बढ़े, पर लाइसेंस पाने में छूट रहे हैं पसीने

Mon, 21 Mar 2022 05:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा सचिन त्रिपाठी, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 21 Mar 2022 05:25 AM IST
सार

दो साल में 25 फीसदी बढ़े विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र। सिर्फ 16.48 फीसदी को ही मिला इलाज का लाइसेंस।

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Medical degree holders from abroad increased, but problem in getting license in up
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

मेडिकल कॉलेजों की कमी और दाखिले के लिए तगड़ी जोर आजमाइश के चलते विदेश से एमबीबीएस की डिग्री पाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसी का नतीजा है कि देश में पिछले दो साल में विदेश से डिग्री पाने वालों की संख्या करीब 25 फीसदी बढ़ी है। वहीं, विदेश से डिग्री लेने के बाद देश में इलाज का लाइसेंस पाने के लिए अनिवार्य परीक्षा पास करने वालों की संख्या तेजी से कम हुई है। दो साल पहले तक जहां विदेश से डिग्री पाने वाले 25.79 फीसदी विद्यार्थियों ने यह परीक्षा पास की थी तो हाल ही में यह प्रतिशत सिर्फ 16.48 फीसदी ही रह गया है।

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विदेश से डिग्री लेकर भारत में प्रैक्टिस करने के लिए सभी डॉक्टरों को स्टेट मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराना होता है। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा जैसे कुछ देशों को छोड़कर अन्य देशों से मेडिकल डिग्री लेने वाले छात्रों को पंजीकरण से पहले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) पास करना जरूरी होता है। इसे पास करने के लिए विद्यार्थियों के पास असीमित मौके होते हैं। 
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पर यह परीक्षा पास करने वालों का प्रतिशत बेहद कम रहता है। यह परीक्षा नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन कराता है। बोर्ड से वर्ष 2020 तक के जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में विदेश से डिग्री पाने वाले 28597 विद्यार्थी एफएमजीई में बैठे थे। इसमें से सिर्फ 7375 (25.79 प्रतिशत) विद्यार्थी ही सफल हुए। 2020 में 35774 ने यह परीक्षा दी, लेकिन सफल सिर्फ 5897 (16.48 फीसदी) ही हुए।
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कम फीस और कम मेरिट पर मिल जाता है दाखिला
विदेशी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के बढ़ेत चलन के पीछे दो मुख्य वजह हैं। पहली, भारतीय निजी मेडिकल कॉलेजों के मुकाबले कम फीस तथा अपेक्षाकृत कम मेरिट पर दाखिला। देश में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस जहां एक करोड़ से ऊपर पहुंच जाती है, वहीं विदेश में यह खर्च 70-80 लाख रुपये में निपट जाता है। इससे भी काफी भारतीय छात्र विदेशों का रुख करते हैं।

यूक्रेन, रूस और चीन जैसे देशों से मेडिकल डिग्री लेकर आने पर सरकार को रोक लगानी चाहिए। इससे देश का पैसा विदेश में जाने से रुकेगा। साथ ही मेहनत करके देश में मेडिकल सीट पाने वाले होनहार विद्यार्थियों का हक भी सुरक्षित रहेगा।

- डॉ. संतोष कुमार, महासचिव, केजीएमयू शिक्षक संघ

मैंने वर्ष 2019 में यूक्रेन से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है। इस समय मैं दिल्ली के सरकारी कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहा हूं। यह बात सही है कि यूक्रेन और कई अन्य देश में भारत के मुकाबले आसानी से दाखिला मिल जाता है। इसके बावजूद पढ़ाई के लिए गंभीर छात्र ही यहां प्रैक्टिस कर सकते हैं। जो छात्र गंभीर नहीं हैं, वे यहां परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं। ऐसा होने पर विदेशी में पढ़ाई के लिए बिताया गया पूरा समय बर्बाद हो जाता है।
- डॉ. आकाशदीप, यूक्रेन से मेडिकल डिग्रीधारक 

देश में मेडिकल कॉलेज व सीटों की स्थिति
संस्थान    संख्या    सीट

सरकारी    302    44,555
निजी    293    43,815
कुल    595    88,370

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