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Lucknow News: महापौर का छापा, में गायब मिले 100 से अधिक कर्मचारी-अधिकारी
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लखनऊ। नगर निगम के कर्मचारी-अधिकारी वक्त के कितने पाबंद हैं, इसकी जांच के लिए महापौर ने बुधवार सुबह 10:40 बजे नगर निगम मुख्यालय पर छापा मारा। इस दौरान अपर नगर आयुक्तों सहित 100 से अधिक कर्मचारी-अधिकारी गायब मिले।
इनका एक दिन का वेतन कटने के साथ स्पष्टीकरण भी तलब किया जाएगा। महापौर ने कर्मचारियों की ऑनलाइन दर्ज होने वाली उपस्थिति का ब्योरा भी मांगा है।
मुख्यालय पर गाड़ी से उतरते ही महापौर सुषमा खर्कवाल ने सबसे पहले सभी प्रवेश द्वार पर ताले डलवाए। फिर कार्यालय के अंदर विभागों और अफसरों के कमरे में जाकर जांच शुरू की और वहां रखे हाजिरी रजिस्टर भी उठवा लिए। करीब आधा घंटा तक प्रवेश द्वारा बंद रहे। इस बीच जो कर्मचारी, अधिकारी देर से पहुंचे, वे बाहर ही खड़े रहे। महापौर ने इनका वीडियो भी बनवाया। चर्चा रही कि आज तक किसी महापौर ने ऐसा नहीं किया।
महापौर ने कहा, कर्मचारी-अधिकारी सुबह 11 बजे तक ऑफिस नहीं पहुंचेंगे तो जतना के काम कैसे होंगे। कर्मचारियों के समय से कार्यालय न आने की लगातार शिकायतें मिल रहीं थीं। कई बार कहने के बावजूद कर्मचारी सुधर नहीं रहे हैं।
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निरीक्षण के दौरान मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह, अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव और पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा मौजूद मिले। हालांकि, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, अरुण गुप्ता, ललित कुमार का कमरा खाली था। ललित कुमार चुनाव ड्यूटी के बाद अवकाश पर हैं और पंकज श्रीवास्तव व अरुण गुप्ता राजभवन कार्यक्रम में गए थे। महापौर ने 15 विभागों के गैरहाजिर कर्मचारियों के नाम के आगे लाल पेन से गैरहाजिर लिखकर रजिस्टर शाम को वापस कर दिए।
महापौर के औचक छापे को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि जब कर्मचारियों को देर रात तक काम कराया जाता है तब तो कोई देखने नहीं आता। ओवरटाइम भी नहीं मिलता है। इस तरह गेट पर ताला डलवाकर छापा मारना ठीक नहीं है। इससे उन कर्मचारियों को मनोबल भी गिरता है, जो देर रात तक और अवकाश में भी काम करते हैं। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने कहा कि महापौर की ओर से निरीक्षण के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
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इनका एक दिन का वेतन कटने के साथ स्पष्टीकरण भी तलब किया जाएगा। महापौर ने कर्मचारियों की ऑनलाइन दर्ज होने वाली उपस्थिति का ब्योरा भी मांगा है।
मुख्यालय पर गाड़ी से उतरते ही महापौर सुषमा खर्कवाल ने सबसे पहले सभी प्रवेश द्वार पर ताले डलवाए। फिर कार्यालय के अंदर विभागों और अफसरों के कमरे में जाकर जांच शुरू की और वहां रखे हाजिरी रजिस्टर भी उठवा लिए। करीब आधा घंटा तक प्रवेश द्वारा बंद रहे। इस बीच जो कर्मचारी, अधिकारी देर से पहुंचे, वे बाहर ही खड़े रहे। महापौर ने इनका वीडियो भी बनवाया। चर्चा रही कि आज तक किसी महापौर ने ऐसा नहीं किया।
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महापौर ने कहा, कर्मचारी-अधिकारी सुबह 11 बजे तक ऑफिस नहीं पहुंचेंगे तो जतना के काम कैसे होंगे। कर्मचारियों के समय से कार्यालय न आने की लगातार शिकायतें मिल रहीं थीं। कई बार कहने के बावजूद कर्मचारी सुधर नहीं रहे हैं।
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निरीक्षण के दौरान मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह, अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव और पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा मौजूद मिले। हालांकि, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, अरुण गुप्ता, ललित कुमार का कमरा खाली था। ललित कुमार चुनाव ड्यूटी के बाद अवकाश पर हैं और पंकज श्रीवास्तव व अरुण गुप्ता राजभवन कार्यक्रम में गए थे। महापौर ने 15 विभागों के गैरहाजिर कर्मचारियों के नाम के आगे लाल पेन से गैरहाजिर लिखकर रजिस्टर शाम को वापस कर दिए।
महापौर के औचक छापे को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि जब कर्मचारियों को देर रात तक काम कराया जाता है तब तो कोई देखने नहीं आता। ओवरटाइम भी नहीं मिलता है। इस तरह गेट पर ताला डलवाकर छापा मारना ठीक नहीं है। इससे उन कर्मचारियों को मनोबल भी गिरता है, जो देर रात तक और अवकाश में भी काम करते हैं। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने कहा कि महापौर की ओर से निरीक्षण के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।