स्मारकों को फिजूलखर्च बताना महापुरुषों का अपमान: मायावती
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और आने वाले चुनाव को लेकर समीक्षा की। इस दौरान मायावती ने विरोधी दलों पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कांशीराम जयंती में शामिल हुए लोगों का धन्यवाद दिया और इस दौरान हुई भगदड़ में मरे दो लोगों की मौत पर शोक जताया। साथ ही इस दुर्घटना के लिए सपा शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
मायावती ने कहा, बीएसपी के कार्यक्रमों में तो व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है। लेकिन लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सरकार की बनती है जिसकी कमी रही।
मायावती ने कहा कि यूपी में बसपा का मुकाबला ऐसी सपा और भाजपा सरकारों से है जो हर तरह के हथकंडे अपनाकर लोगों को बरगलाने की कोशिश कर रही है।
बसपा सुप्रीमो ने चुनाव के दौरान सर्वे कराने वाली एजेंसियो को भी विरोधी दलों से मिला हुआ बताया। उन्होंने कहा कि ये सब हथकंडे बसपा का मनोबल गिराने के लिए अपनाए जा रहे हैं।
बसपा के कामों का विज्ञापन देकर लिया जा रहा श्रेय
मायावती सपा सरकार पर भी हमलावर दिखीं और कहा, महापुरुषों के सम्मान में बीएसपी ने जो भव्य स्थल, स्मारक और पार्क बनवाए हैं बीएसपी उसे फिजूलखर्ची बताकर उनका अपमान कर रही है।
मायावती ने आरोप लगाया कि बसपा सरकार के समय में बनने वाले अंबेडकर ग्रीन गार्डेन का नाम बदलकर जनेश्वर मिश्र पार्क करने के साथ कई जिलों और शिक्षण संस्थानों का नाम बदलना सपा सरकार की ओछी मानसिकता है जिसे कभी माफ नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि बसपा के ऐतिहासिक कामों को सपा फिजूलखर्ची बताती है जबकि लोहिया पार्क और इटावा में मौज-मस्ती के लिए लायन सफारी, सैफई महोत्सव फिजूलखर्च नहीं तो क्या है?
मायावती ने कहा कि सपा सरकार विकास की जितनी भी योजनाओं का बखान करती है वो सब बसपा सरकार की चलाई हुई हैं। उन्होंने कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिए विज्ञापन देकर नोएड और लखनऊ मेट्रो का श्रेय लेना क्या यही नया समाजवाद है?