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माटीकला महोत्सव: महिला कारीगरों का हुनर, स्वावलंबन की नई राह
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माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी
लखनऊ। हुनर और आत्मविश्वास के साथ अगर सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की वजह बन जाते हैं। ऐसे ही बदलाव उन महिलाओं के जीवन में भी आए हैं जिन्होंने अपने हुनर को कारीगरी के रूप में प्रदर्शित किया। यह महिलाएं अपने साथ अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं। माटीकला महोत्सव में पुरुष कारीगरों के साथ-साथ महिलाओं ने भी अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं और इनके उत्पाद लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं।
बाराबंकी के चैनपुरवा गांव की उजाला ने शहद और मोमबत्ती व दियों का स्टॉल लगाया है। उजाला ने बताया कि उनके गांव में एक समूह के रूप में ये उत्पाद बनाए जाते हैं। महोत्सव से उन्हें काफी सहयोग मिलता है और नए लोग जुड़ते हैं।
शहर की नरही निवासी नीलम ने मिट्टी की मूर्तियों और घर की सजावट के सामान प्रदर्शित किए हैं। नीलम ने आठ साल पहले यह काम शुरू किया था। अब उन्होंने चार और युवतियों को साथ जोड़ा है जो उनकी मदद से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।
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लखनऊ के इंदिरानगर की रचना ने टेराकोटा आभूषण और सेरेमिक उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। उन्होंने हस्तशिल्प का काम करीब छह साल पहले कोविड के दौरान शुरू किया था। रचना को टेराकोटा आभूषणों को कस्टमाइज करके बनाना पसंद है। खुशहालगंज की मुन्नी ने मिट्टी की मूर्तियां और खिलौनों का स्टॉल लगाया है। मुन्नी बचपन से मिट्टी के उत्पाद बना रही हैं जिससे उन्हें वाजिब दाम और सराहना मिलती है।
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बाराबंकी के चैनपुरवा गांव की उजाला ने शहद और मोमबत्ती व दियों का स्टॉल लगाया है। उजाला ने बताया कि उनके गांव में एक समूह के रूप में ये उत्पाद बनाए जाते हैं। महोत्सव से उन्हें काफी सहयोग मिलता है और नए लोग जुड़ते हैं।
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शहर की नरही निवासी नीलम ने मिट्टी की मूर्तियों और घर की सजावट के सामान प्रदर्शित किए हैं। नीलम ने आठ साल पहले यह काम शुरू किया था। अब उन्होंने चार और युवतियों को साथ जोड़ा है जो उनकी मदद से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।
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लखनऊ के इंदिरानगर की रचना ने टेराकोटा आभूषण और सेरेमिक उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। उन्होंने हस्तशिल्प का काम करीब छह साल पहले कोविड के दौरान शुरू किया था। रचना को टेराकोटा आभूषणों को कस्टमाइज करके बनाना पसंद है। खुशहालगंज की मुन्नी ने मिट्टी की मूर्तियां और खिलौनों का स्टॉल लगाया है। मुन्नी बचपन से मिट्टी के उत्पाद बना रही हैं जिससे उन्हें वाजिब दाम और सराहना मिलती है।

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

माटी कला महोत्सव में लगी प्रदर्शनी

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