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सोनभद्र के जमीन विवाद से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें शासन से गायब
Sun, 18 Aug 2019 02:51 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sun, 18 Aug 2019 02:51 PM IST
सार
- रेणुका कुमार की कमेटी के जांच शुरू करते ही सामने आया एक और मामला
- गायब होने वाली फाइलों में जेपी ग्रुप को जमीन देने संबंधी फाइलें भी शामिल
- सीएम कार्यालय ने मांगी है रिपोर्ट, जानबूझकर मामले को लटकाने की कोशिश
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सोनभद्र हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सोनभद्र के जमीन विवाद से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें शासन के वन विभाग से गायब हो गई हैं। कई बार फाइलें मागें जाने पर भी नहीं मिलीं तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई। इस पर शनिवार को छुट्टी होने के बावजूद दिन भर रिकॉर्ड खंगाला गया।
हालांकि, ये फाइलें शानिवार को भी नहीं मिल पाई थीं। संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए दो-तीन दिन का समय और मांगा है। इसके बाद फाइलें न मिलने पर उच्च स्तर से आगे की कार्यवाही का निर्णय ले लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सोनभद्र में राजनेताओं, अधिकारियों और दबंगों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वन विभाग की भूमि कब्जाने की शिकायत की गई थी। इसमें बसपा शासन में जेपी ग्रुप को अवैध रूप से एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन देने का मामले का भी जिक्र किया गया था।
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मुख्यमंत्री योगी ने राज्यपाल आनंदीबेन से की मुलाकात, मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज
हालांकि, बाद में एनजीटी की सख्ती के बाद प्रदेश सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर जेपी ग्रुप से जमीन वापस लेनी पड़ी थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जेपी ग्रुप को जमीन देने का अवैध निर्णय लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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हालांकि, ये फाइलें शानिवार को भी नहीं मिल पाई थीं। संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए दो-तीन दिन का समय और मांगा है। इसके बाद फाइलें न मिलने पर उच्च स्तर से आगे की कार्यवाही का निर्णय ले लिया जाएगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सोनभद्र में राजनेताओं, अधिकारियों और दबंगों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वन विभाग की भूमि कब्जाने की शिकायत की गई थी। इसमें बसपा शासन में जेपी ग्रुप को अवैध रूप से एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन देने का मामले का भी जिक्र किया गया था।
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हालांकि, बाद में एनजीटी की सख्ती के बाद प्रदेश सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर जेपी ग्रुप से जमीन वापस लेनी पड़ी थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जेपी ग्रुप को जमीन देने का अवैध निर्णय लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
इतना ही नहीं इनमें से कुछेक अधिकारी सजा पाने के बजाय वर्तमान में वन विभाग में उच्च पद पर आसीन हैं। इस शिकायत के साथ वन विभाग के पूर्व मुख्य वन संरक्षक एके जैन की रिपोर्ट भी लगाई गई है, जिसमें एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि को खुर्द-बुर्द करने के सुबूत दिए गए थे।
लेकिन, शासन के अधिकारियों ने जैन की रिपोर्ट का संज्ञान लेने के बजाय इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। बताते हैं कि इसकी कीमत जैन को पिछले साल एक हादसे के रूप में अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी। सीएम से वन भूमि के अलावा अन्य भूमि कब्जाने की भी शिकायत की गई थी।
इस पर सीएम कार्यालय ने शासन के वन विभाग से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, जवाब तैयार करने के लिए फाइलें खंगाली गईं तो जो स्थिति सामने आई, उससे अधिकारी भी हैरान रह गए। संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें शासन में है ही नहीं, जबकि इन्हें वन मुख्यालय से शासन को भेजा गया था।
सबसे चौंकाने वाली बात जेपी ग्रुप को जमीन देने से संबंधित फाइलों का न मिलना है। बताते हैं कि जेपी ग्रुप को जिन दस्तावेजों के आधार पर जमीन दी गई थी, उस पर वन विभाग के कई अधिकारियों ने साइन करने से इन्कार कर दिया था। इसके बावजूद तत्कालीन सचिव ने अपने दस्तखत करते हुए जेपी ग्रुप को जमीन देने का आदेश जारी कर दिया। बाद में इस पर सुप्रीम कोर्ट के अधीन कार्यरत सीवीसी ने भी आपत्ति जताई थी।
लेकिन, शासन के अधिकारियों ने जैन की रिपोर्ट का संज्ञान लेने के बजाय इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। बताते हैं कि इसकी कीमत जैन को पिछले साल एक हादसे के रूप में अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी। सीएम से वन भूमि के अलावा अन्य भूमि कब्जाने की भी शिकायत की गई थी।
इस पर सीएम कार्यालय ने शासन के वन विभाग से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, जवाब तैयार करने के लिए फाइलें खंगाली गईं तो जो स्थिति सामने आई, उससे अधिकारी भी हैरान रह गए। संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें शासन में है ही नहीं, जबकि इन्हें वन मुख्यालय से शासन को भेजा गया था।
सबसे चौंकाने वाली बात जेपी ग्रुप को जमीन देने से संबंधित फाइलों का न मिलना है। बताते हैं कि जेपी ग्रुप को जिन दस्तावेजों के आधार पर जमीन दी गई थी, उस पर वन विभाग के कई अधिकारियों ने साइन करने से इन्कार कर दिया था। इसके बावजूद तत्कालीन सचिव ने अपने दस्तखत करते हुए जेपी ग्रुप को जमीन देने का आदेश जारी कर दिया। बाद में इस पर सुप्रीम कोर्ट के अधीन कार्यरत सीवीसी ने भी आपत्ति जताई थी।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि छुट्टी के दिन भी शनिवार को फाइलें ढूंढने के लिए लगाया गया। संबंधित कार्मिकों को दो-तीन का और समय दिया गया है, इसके बाद भी अगर फाइलें नहीं मिलती हैं, तो नियमानुसार एफआईआर करा दी जाएगी।
हालांकि, एक अधिकारी का यह भी कहना है कि कुछ कार्मिक मामले को जानबूझकर लटकाना चाहते हैं। फाइलें गायब दिखाना उनका षड्यंत्र भी हो सकता है। यहां बता दें कि जमीन विवाद में सोनभद्र नरसंहार के बाद सोनभद्र व मिर्जापुर में कृषि सहकारी समितियों के नाम दर्ज जमीन और एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अवैध कब्जों की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है।
इस कमेटी ने हाल ही में जांच शुरू की है। इसी दौरान फाइलें गायब होने का मामला भी सामने आ गया।
हालांकि, एक अधिकारी का यह भी कहना है कि कुछ कार्मिक मामले को जानबूझकर लटकाना चाहते हैं। फाइलें गायब दिखाना उनका षड्यंत्र भी हो सकता है। यहां बता दें कि जमीन विवाद में सोनभद्र नरसंहार के बाद सोनभद्र व मिर्जापुर में कृषि सहकारी समितियों के नाम दर्ज जमीन और एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अवैध कब्जों की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है।
इस कमेटी ने हाल ही में जांच शुरू की है। इसी दौरान फाइलें गायब होने का मामला भी सामने आ गया।